कॉपी में दिखी प्रतिभा, मिला मंच
जूनियर हाईस्कूल गुलावठी खुर्द की शिक्षिका कोमल चावला ने छात्रों की कॉपी में बने चित्रों को देखकर उसकी चित्रकारी की प्रतिभा पहचानी। शुरुआत में छात्र प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से झिझकते थे। उन्होंने लगातार प्रोत्साहित किया और स्कूल के बाद अभ्यास कराया। पहली कोशिश में सफलता नहीं मिली, लेकिन हौसला नहीं टूटने दिया गया। बाद में छात्रों ने प्रतियोगिताओं में पुरस्कार हासिल किए और अब कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देख रही है।
मजबूरी के कारण छूट रही पढ़ाई बचाई
कंपोजिट विद्यालय लुहारली के शिक्षक जितेंद्र कुमार ने छात्रों की लगातार गैरहाजिरी पर कारण जानने की कोशिश की। घर पहुंचने पर पता चला कि परिवार आर्थिक परेशानी से गुजर रहा है और छात्रों को भी जिम्मेदारियों में हाथ बंटाना पड़ रहा है। शिक्षक ने परिवार से बातचीत की, उपलब्ध सहायता की जानकारी दी और छात्र को दोबारा पढ़ाई से जोड़ा। अतिरिक्त समय देकर छूटा पाठ पूरा कराया गया। धीरे-धीरे उसकी उपस्थिति और परीक्षा परिणाम दोनों सुधरने लगे।
मैदान में पहचाना हुनर
प्राथमिक विद्यालय दुजाना एक के शिक्षक आशीष नागर की नजर छात्रों की खेल प्रतिभा पर पड़ी। पढ़ाई में सामान्य प्रदर्शन करने वाले छात्र खेल के मैदान में सबसे अलग नजर आ रहे थे। उन्होंने छात्रों को नियमित अभ्यास कराना शुरु किया। सीमित संसाधनों के बावजूद छात्रों ने ब्लॉक और फिर जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन किया। अब वह खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देख रहा है।