करनाल। बाहरी वाहनों के यातायात दबाव को कम करने और शहर को एक परिधि में पिरोने वाले रिंग रोड के निर्माण कार्य को पूरा करने की पहली डेडलाइन बीत चुकी है। अब तक एनएचएआई की ओर से 74 प्रतिशत निर्माण कार्य ही किया गया है। शेष बचे 26 प्रतिशत में तीन पुल एवं फ्लाईओवर और 12 किलोमीटर लंबी सड़क बननी शेष है। मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। दावा है कि इसके बाद से रिंग रोड से वाहन दौड़ना शुरू हो जाएंगे।
एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि बजीदा के पास रेलवे पुल, शामगढ़, कुटेल और उससे थोड़ा आगे का पुल बनाया जाना अभी शेष है। डीपीआर यानी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण कार्य को अगस्त, 2025 तक पूरा करना था लेकिन वर्ष 2024 में प्रदूषण बढ़ने के बाद लगे ग्रैप-4 के कारण निर्माण कार्य काफी समय तक बंद रहा। इसका असर यह हुआ कि अब निर्माण कार्य को पूरा करने की तारीख 7 माह तक आगे बढ़ाई गई है।
कुल 34 किलोमीटर लंबा यह रिंग रोड 23 गांवों से गुजर रहा है। इसके निर्माण में केंद्र व राज्य सरकार की ओर से करीब 1700 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। जून 2023 में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने इसका शिलान्यास किया था। 27 माह में 60 मीटर चौड़े छह लेन रिंग रोड पर 20 जगह अंडरपास भी दिए गए हैं। 22 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जा चुकी है। सरकार की ओर से एनएचएआई के भारतमाला परियोजना के तहत अगले 30 साल की आबादी और ट्रैफिक लोड को ध्यान में रखते हुए रिंग रोड प्रोजक्ट तैयार किया गया था। ब्यूरो
15 फ्लाईओवर और छह प्रवेश-निकास
प्रोजेक्ट की डीपीआर के अनुसार, करनाल ग्रीन फिल्ड के तहत छह लेन का हाईवे होगा। 60 मीटर चौड़े हाईवे पर 15 फ्लाईओवर और 20 अंडरपास होंगे। ताकि स्थानीय लोग आराम से हाईवे पार कर सकें। गांव के लोगों को चढ़ने उतरने में दिक्कत न हो, इसलिए करीब छह जगह से हाईवे पर जाने के लिए प्रवेश और निकास के लिए कट भी दिए जाएंगे।
ऐसे दो फेज में बंटा रिंग रोड
फेज-1 : राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर शामगढ़ से विवान होटल के नजदीक से शुरू होकर गांव दरड़ से नेवल, शेखपुरा, गंजोगढ़ी से होते कुटेल के पास टोल प्लाजा तक।
फेज-2 : पश्चिमी यमुना नहर की पटरी पर बनी सड़क जो कैथल रोड को क्रॉस करती आगे बड़ौता गांव तक जाएगी और वहां से खरकाली, झिमरहेड़ी होते एनएच-44 को पार करते हुए दरड़ के पास मिलेगा।
इन 23 गांवों से गुजर रहा रिंग रोड
परियोजना में नीलोखेड़ी खंड के गांव शामगढ़, दादूपर, झंझाड़ी, कुराली, दरड़, सलारू, टपराना, दनियालपुर व नेवल, करनाल खंड के गांव कुंजपुरा, सुभरी, छपराखेड़ा, सुहाना, शेखपुरा, रांवर, गंजोगढ़ी, बड़ौता, कुटेल व ऊंचासमाना और घरौंडा खंड के गांव खरकाली, झिमरहेड़ी, समालखा व बिजना सहित 23 गांवों से रिंग रोड गुजर रहा है।
मुख्य लाभ : यातायात दबाव और प्रदूषण घटेगा
रिंग रोड बनने से राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर वाहनों का दबाव आधा ही रह जाएगा। इससे प्रदूषण का स्तर भी घटेगा। अभी 24 घंटे में करीब 90 हजार से ज्यादा वाहन हाईवे से गुजरते हैं। इसके बनने के बाद यह राष्ट्रीय राजमार्ग के अलावा पांच अन्य राजमार्गों को भी जोड़ेगा।
- जुड़ेंगे राजमार्ग
1. राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर शामगढ़ से होते हुए कुराली के रास्ते करनाल-लाडवा राजमार्ग से जुड़ेगा।
2. दरड़ से नेवल होते हुए करनाल-यमुनानगर राजमार्ग जुड़ेगा।
3. सुभरी, सुहाना, शेखपुरा से निकल रांवर की ओर जाते हुए करनाल-मेरठ राजमार्ग से जुड़ेगा।
4. गंजोगढ़ी, कुटेल और ऊंचासमाना से होकर मेरठ रोड को राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से जोड़ेगा।
5. गांव खरकाली, बीजना, समालखा से होते हुए पश्चिमी यमुना बाईपास के रास्ते राष्ट्रीय राजमार्ग-44 कैथल राजमार्ग से जुड़ेगा।
6. कैथल राजमार्ग से पश्चिमी यमुना बाईपास के रास्ते काछवा रोड और राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर उचाना के पास मिलेगा।
रिंग रोड का 26 प्रतिशत कार्य ही शेष है। यदि इस बार ग्रैप-4 की स्थिति नहीं बनी तो मार्च, 2026 से पहले काम पूरा कर लेंगे। 15 किलोमीटर की सर्विस लेन भी बन चुकी है। तीन पुल और 12 किलोमीटर की मुख्य सड़क बनना शेष है। - रविन्द्र कुमार, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई
61....सुभरी गांव के समीप बनता रिंग रोड। संवाद