गाजियाबाद। मेरठ रोड पर पकड़े गए पांच ट्रकों में भरे सिरप सहारनपुर की एमवी फार्मासिस्ट कंपनी के बिल पर बांग्लादेश भेजना पाया गया है। क्राइम ब्रांच की टीम की जांच में सामने आया कि एमवी फार्मासिस्ट का मालिक विभोर राणा है। उन्होंने अपने नौकर अभिषेक शर्मा के नाम से फार्मासिस्ट कंपनी का लाईसेंस लिया और अपने भाई के साथ मिलकर 200 करोड़ रुपये का कारोबार किया। 12 नवंबर को लखनऊ की एसटीएफ ने विभोर राणा व उसके भाई विशाल राणा सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़ी सिरप में विभोर राणा का नाम उजागर होने पर जल्द ही एसआईटी इसे रिमांड पर गाजियाबाद लाएगी।
एडीसीपी अपराध पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि सहारनपुर के विभोर राणा की एमवी फार्मासिस्ट के बिल और मोहर टीम ने ट्रकों से बरामद किए थे। इस कंपनी का मालिक अभिषेक शर्मा को दर्शाया था। जांच में पाया गया कि अभिषेक शर्मा विभोर राणा का नौकर है और उसके नाम पर एमवी फार्मासिस्ट कंपनी सहारनपुर में खोली गई थी। जांच में सामने आया कि कफ सिरप को नशे के रूप में प्रयोग करने के लिए इसका अवैध भंडारण और व्यापार किया जा रहा है। इस दवा को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश तक तस्करी किया जा रहा है।
एडीसीपी ने बताया कि जांच में ये भी सामने आया कि विभोर राणा वर्ष 2018 में अपनी फर्म जीआर ट्रेडिंग के नाम पर एबॉट कंपनी से सुपर डिस्ट्रीब्यूशनशिप ली थी। बाद में फर्जी फर्में बनवाकर फेंसेडिल सिरप को असली रिटेलर्स को देने के बजाय नशे के कारोबारियों को ऊंचे दामों में बेचा जाता था। इस गोरखधंधे में विभोर राणा ने 200 करोड़ रुपये की सिरप की खरीद और बिक्री का व्यापार किया है। बताया कि एसडीएफ लखनऊ की गिरफ्त में विभोर राणा को जल्द ही रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। बताया कि इससे पूर्व विभोर राणा वर्ष 2022 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) वेस्ट बंगाल द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है।