- ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को सर्वोच्च न्यायालय से मिला बड़ा झटका
-कर्मचारियों को 46 करोड़ का भुगतान करने के साथ बहाल करना होगा
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। नौकरी से निकाले गए 240 माली और सफाई कर्मचारियों को सर्वोच्च न्यायालय ने बड़ी राहत दी है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को इन कर्मचारियों को 46 करोड़ रुपये का भुगतान करने के साथ बहाल भी करना होगा। उच्च न्यायालय की ओर से सुनाए गए फैसले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने आवेदन पर सुनवाई नहीं की।
दरअसल, प्राधिकरण ने वर्ष 2003 में 240 कर्मचारियों को बिना नोटिस के नौकरी से हटा दिया था। पीड़ित कर्मचारी सीटू के नेतृत्व में अपने हक के लिए तभी से लड़ाई लड़ रहे हैं। इसे मामले को औद्योगिक न्यायाधिकरण पंचम,मेरठ में उठा गया, जिसने मई वर्ष 2018 में कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया। इस फैसले में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को आदेश दिया गया था, कि वह कर्मचारियों को कार्य पर पुनः बहाल करे और पिछले वेतन का भुगतान भी करे। प्राधिकरण ने इस आदेश का पालन नहीं किया और उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। उच्च न्यायालय ने भी कर्मचारियों के पक्ष में आकर प्राधिकरण की सभी याचिकाएं खारिज कर दीं और औद्योगिक न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए आदेश को बहाल कर दिया।
न्यायालय ने जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर को निर्देश दिए कि वे 90 दिनों के भीतर प्राधिकरण से राशि वसूल कर कर्मचारियों को भुगतान कराएं और उन्हें वापस काम पर बहाल करें। इसके बाद प्राधिकरण ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। बता दें कि इस विवाद की शुरूआत वर्ष 1998 से हुई थी। प्राधिकरण में माली और सफाईकर्मियों ने स्थायी किए जाने की मांग उठाई थी। कर्मचारियों के हक की लड़ाई लड़ रहे ग्रेटर नोएडा माली एवं सफाई कामगार यूनियन संबंध सीआईटीयू के महामंत्री रामकिशन सिंह ने बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा अक्टूबर 2024 को दिए गए फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय गए प्राधिकरण के आवेदन पर सुनवाई करने से न्यायालय ने इंकार कर दिया है। हम कानूनी प्रक्रिया से जीत कर आए हैं।