अमेठी। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद एएनएम की 17 छात्राएं परीक्षा देने के लिए किसी तरह बरेली पहुंचीं। वहां रजा कॉलेज आफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंस ने करीब आठ लाख रुपये बकाया बता दिया। पहला पेपर देने का मौका दिया, लेकिन अगले पेपर से पहले बकाया जमा करना होगा। छात्रा पूजा के परिजन कुलदीप ने बताया कि कॉलेज के खाते में एक लाख भेजा गया, तब जाकर सोमवार को किसी तरह पहला पेपर दिलाया गया। मंगलवार को होने वाली अगली परीक्षा के लिए शेष रकम जमा करने की शर्त रखी गई है। ऐसे में पैसा जमा नहीं हुआ तो छात्राएं परीक्षा से वंचित हो जाएंगी।
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अमेठी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल एंड साइंस में छात्राओं के साथ फर्जीवाड़ा करने के प्रकरण में रविवार देर रात नौ लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आ गया। सोमवार सुबह करीब 11:30 बजे एसीएमओ डॉ. रामप्रसाद की अगुवाई में पांच सदस्यीय टीम कॉलेज पहुंची और जांच शुरू की। टीम के साथ पांच छात्राएं भी मौजूद रहीं। उन्होंने प्रवेश प्रक्रिया से लेकर क्लास संचालन और परीक्षा की तैयारी तक की पूरी जानकारी दी। छात्राओं ने बताया कि दाखिला लेने के बाद न तो सही ढंग से पढ़ाई कराई गई और न ही रजिस्ट्रेशन या प्रवेशपत्र उपलब्ध कराया गया। लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद उनका भविष्य अधर में पड़ गया है।
जांच दल ने मौके पर कक्षा कक्ष, लैब और कार्यालय की जांच की। कॉलेज से जुड़े दस्तावेज को भी खंगाला। टीम ने देखा कि किस तरह दिखावे के लिए व्यवस्था खड़ी की गई, जबकि असलियत कुछ और ही है। जांच के दौरान संस्थान के संचालक आजम उर्फ प्रिंस, प्राचार्य विवेक श्रीवास्तव और सहयोगी आयुष को भी बुलाया गया। टीम ने तीनों से बारी-बारी पूछताछ की और यह जानने की कोशिश की कि इस नेटवर्क में उनकी और अन्य स्टाफ की भूमिका क्या रही।
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एसीएमओ डॉ. रामप्रसाद ने कहा कि मौके पर मिली जानकारी और छात्राओं के बयान के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसे मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सौंपा जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई होगी। छात्राओं के साथ फर्जीवाड़ा करने की बात सामने आई है।
डी फार्मा के छात्रों ने भी खोला मोर्चा
अमेठी। संस्था पर सोमवार को डीफार्मा के छात्रों ने भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि मोटी रकम लेकर प्रवेश तो कराया गया, लेकिन परीक्षा के समय प्रवेशपत्र ही उपलब्ध नहीं कराया गया। मेहनत और पैसा दोनों डूबने से उनका भविष्य बर्बाद हो जाएगा। मुसाफिरखाना दादरा निवासी कपिल अग्रहरि ने बताया कि वर्ष 2023 में लगभग 80 विद्यार्थियों को मैनपुरी बस से ले जाकर परीक्षा दिलाने की बात कही गई थी। दो लाख रुपये वसूले गए, लेकिन वहां पहुंचने पर परीक्षा वाले दिन किसी को प्रवेशपत्र नहीं मिला। हंगामे के बाद शाम चार बजे कुछ प्रवेशपत्र भेजे गए, तब तक पहला पेपर छूट चुका था। जायस निवासी विशाल द्विवेदी ने कहा कि उनसे भी दो लाख रुपये लिए गए। परीक्षा देने का मौका ही नहीं मिला। गौरीगंज के मऊ निवासी अनुराग मौर्य ने कहा कि पूरी फीस जमा करने के बावजूद मार्कशीट नहीं दी गई। इसके लिए 40 हजार रुपये मांगे जा रहे हैं।
एएनएम की पढ़ाई नहीं, फीस वापस चाहिए
एएनएम की पढ़ाई के नाम पर खेल का पर्दाफाश होने के बाद इसी सत्र में दाखिला लेने वाली छात्राएं भी सामने आ गई हैं। सोमवार को विभिन्न इलाकों से लगभग 17 छात्राएं अपने परिजनों के साथ कोतवाली पहुंचीं और अधिकारियों से फीस वापसी का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अब यहां से एएनएम की पढ़ाई नहीं करनी है।
शैक्षिक सत्र 2025-26 में एएनएम कोर्स के लिए छात्रा नेहा ने 95 हजार रुपये, शिवानी ने 35 हजार, नेहा कुमारी ने 30 हजार, ज्योति ने 28 हजार, तृषा ने पांच हजार, शिवानी कुमारी ने 45 हजार और नीशू ने 65 हजार रुपये जमा किए। इनके अलावा करीब 30 छात्राओं ने भी फीस जमा की। पीड़ितों ने कहा कि घरवालों ने बड़ी मुश्किल से यह पैसा जुटाया था। किसी ने कर्ज लिया, तो किसी ने जेवर गिरवी रखकर रकम दी। संस्थान की असलियत सामने आने के बाद अब पढ़ाई जारी रखना संभव नहीं है।