डीएम का फर्जी आदेश जारी करने के मामले में एक छात्र को जमानत
नोएडा। स्कूलों में छुट्टी के लिए जिलाधिकारी का फर्जी आदेश जारी करने के मामले में दोनों छात्रों को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया। बोर्ड ने एक छात्र को जमानत दे दी। वहीं दूसरे छात्र की सोशल इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट (एसआईआर) नहीं आने की वजह से उसकी अंतरिम जमानत 24 जनवरी तक बढ़ा दी।
दरअसल, दिसंबर में ठंड और प्रदूषण की वजह से कई दिनों तक छुट्टियां रही थीं। छुट्टियां खत्म होने से एक दिन पहले ही जिले के एक सरकारी इंटर कॉलेज के दो छात्रों ने डीएम का दो दिन की छुट्टी का फर्जी आदेश जारी कर दिया। डीएम के निर्देश पर दोनों छात्रों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। बाद में धाराओें को कम कर उन्हें अंतरिम जमानत दे दी गई थी। किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य अनित बघेल ने बताया कि दोनों छात्रों के प्रिंसिपल को भी बुलाया गया था। उनके बयान के आधार पर दोनों को किशोर घोषित किया गया था। लेकिन उनकी सोशल इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट मंगाई गई थी। नोएडा निवासी छात्र की एसआईआर रिपोर्ट आने के बाद उसे जमानत दे दी गई है। जबकि दिल्ली के रहने वाले छात्र की एसआईआर रिपोर्ट नहीं आने पर उसकी अंतरिम जमानत 24 जनवरी तक बढ़ा दी है। जब तक एसआईआर रिपोर्ट नहीं आएगी तब तक उसे जमानत नहीं दी जा सकती।
क्या होती है एसआईआर रिपोर्ट
जब कोई किशोर कोई अपराध कर देता है तो उस जिले या प्रदेश के जिला प्रोबेशन अधिकारी द्वारा उस क्षेत्र की रिपोर्ट दी जाती है जहां पर किशोर रहता है। अधिकारी द्वारा रिपोर्ट में बताया जाता है कि किशोर का व्यवहार कैसा है, उसने पहले कभी कोई अपराध तो नहीं किया। इस रिपोर्ट के आधार पर ही जमानत दी जाती है। यदि रिपोर्ट किशोर के खिलाफ आती है तो जमानत नहीं दी जाती।
पुलिस ने आनन-फानन में की कार्रवाई : वीरेश चंद्रा
किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट वीरेश चंद्रा ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए कहा कि बच्चों के प्रति समाज के हर वर्ग और हर व्यक्ति को संवेदनशील होना चाहिए। पुलिस ने आनन- फानन में जो कार्रवाई की थी, वह छात्रों पर नहीं होनी चाहिए थी।