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Noida News: पूरा नहीं होगा अंतरिक्ष ग्रैंड व्यू प्रोजेक्ट, वापस होगा खरीदारों का पैसा

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बिल्डर कंसोर्टियम इंफ्रास्ट्रक्चर ने यूपी रेरा में प्रोजेक्ट सरेंडर करने का किया आवेदन
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यूपी रेरा ने देनदारी के लिए प्रोजेक्ट खरीदारों और अन्य हितधारकों से मांगे दावे

माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। नोएडा के सेक्टर-150 स्थित अंतरिक्ष ग्रैंड व्यू प्रोजेक्ट पूरा नहीं होगा। बिल्डर कंसोर्टियम इंफ्रास्ट्रक्चर ने उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) में प्रोजेक्ट सरेंडर करने का आवेदन किया है, जिसके बाद यूपी रेरा प्रोजेक्ट को सरेंडर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और प्रोजेक्ट के खरीदारों के साथ-साथ अन्य हितधारकों से 15 दिन के अंदर देनदारी के बारे में सूचना मांगी है। देनदारी चुकाने के बाद ही यूपी रेरा आगे की कार्रवाई करेगा।

यूपी रेरा के अफसरों ने बताया कि नोएडा के सेक्टर-150 में कंसोर्टियम इंफ्रास्ट्रक्चर का अंतरिक्ष ग्रैंड व्यू प्रोजेक्ट है। बिल्डर ने वर्ष 2016 में प्रोजेक्ट को यूपी रेरा में पंजीकृत कराया था। पंजीकरण में तय समय तक बिल्डर प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर सका। उसके बाद पंजीकरण का समय विस्तार किया गया। बिल्डर को सितंबर, 2022 तक प्रोजेक्ट पूरा करना था, तब भी प्रोजेक्ट को पूरा नहीं किया गया। पंजीकरण समाप्त होने के बाद यूपी रेरा ने बिल्डर से प्रोजेक्ट की वास्तविक स्थिति के बारे में जानकारी मांगी। अगर प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ है तो फिर यूपी रेरा की धारा-8 के तहत प्रोजेक्ट का निर्माण फिर से शुरू कराने का प्रयास किया गया, लेकिन बिल्डर ने आवेदन नहीं किया। बिल्डर ने प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर पाने का हवाला दिया और सरेंडर करने का आवेदन किया है।
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यूपी रेरा के अफसरों ने बताया कि सरेंडर का आवेदन स्वीकार करने से पहले प्रोजेक्ट के खरीदारों और अन्य हितधारकों की देनदारी का हिसाब करना होगा। यूपी रेरा ने प्रोजेक्ट से जुड़े खरीदारों और अन्य हितधारकों से आवेदन मांगे हैं। अगर किसी का पैसा बिल्डर पर बकाया है तो तीन अक्तूबर तक यूपी रेरा को प्रार्थना पत्र देना होगा। उनकी देनदारी का बिल्डर से हिसाब कराया जाएगा।
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अब तक 56 प्रोजेक्ट हो चुके हैं बंद
यूपी रेरा में अब तक 3479 प्रोजेक्ट पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें से 56 प्रोजेक्ट को सरेंडर कर दिया गया है। सबसे अधिक लखनऊ में 12 प्रोजेक्ट बंद हो चुके हैं, जबकि दूसरे नंबर पर गौतमबुद्ध नगर है। यहां पर अब तक 8 प्रोजेक्ट सरेंडर हो चुके हैं, जिनकी संख्या अब 9 हो जाएगी। वहीं गाजियाबाद में अब तक 3 प्रोजेक्ट सरेंडर हो चुके हैं।
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