बास (हिसार)। क्षेत्र के गांव मदनहेड़ी से विदेशी भाषा का कोर्स करने रूस गए सोनू की यूक्रेन के साथ जंग में मौत हो गई है। सोनू को नौकरी का झांसा देकर रूसी की सेना में भर्ती करा दिया था। इसके बाद उसे युद्ध के लिए भेज दिया गया। रूसी सेना के कमांडर द्वारा सोमवार को सोनू के परिजनों को फोन पर उसकी मौत की जानकारी दी गई। सोनू के शव का फोटो भी भेजा है।
हालांकि परिवार का कहना है कि शव किसी और का हो सकता है। क्योंकि शव की हालत बहुत खराब है और पहचान करना मुश्किल है। गांव का एक और युवक अमन भी रूस में है। उसके बारे में अभी परिजनों को कोई पता नहीं है। सोनू के चचेरे भाई अनिल ने बताया कि रूसी आर्मी के कमांडर ने फोन पर बताया कि यूक्रेन के ड्रोन हमले में सोनू की मौत हो गई है। उसका शव एयर लिफ्ट कर बुधवार सुबह तक भारत पहुंचाया जा सकता है। अनिल ने बताया कि सोनू मई 2024 में विदेशी भाषा का कोर्स करने रूस गया था। गांव का ही 24 वर्षीय अमन भी उसके साथ गया था।
3 सितंबर को सोनू ने आखिरी बार घर पर फोन किया और बताया था कि उसे जबरन सेना में भर्ती किया जा रहा है। इसके बाद 19 सितंबर को रूस से एक पत्र आया जिसमें लिखा था कि सोनू 6 सितंबर से लापता है। 6 अक्तूबर को रूसी सेना ने दोबारा पत्र भेजकर बताया कि सोनू की युद्ध में मौत हो गई है। लेकिन जो फोटो भेजी गई थी, परिजनों ने उसका सोनू का होने से इन्कार कर दिया था।
मुझे जबरन सेना में भर्ती कर लिया
अमन ने हाल ही परिवार को भेजे करीब एक मिनट के वीडियो में बताया कि 25 अगस्त को उसे गार्ड की नौकरी का झांसा देकर रूस बुलाया गया, लेकिन बाद में जबरन सेना में भर्ती कर लिया गया। 12 दिन की ट्रेनिंग के बाद उसे सीधे बॉर्डर पर लड़ने भेज दिया। अमन ने कहा कि यहां रोज बमबारी होती है। हर दिन कोई न कोई आंखों के सामने मरता है। पता नहीं अगला नंबर किसका होगा।