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स्वच्छता सर्वे में ग्रेनो को पहले पायदान पर पहुंचाएंगे छह कदम

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स्वच्छता सर्वे में ग्रेनो को पहले पायदान पर पहुंचाएंगे छह कदम
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ग्रेटर नोएडा। चौड़ी सड़कें और हरियाली ग्रेटर नोएडा की पहचान है। अब ग्रेनो प्राधिकरण स्वच्छता सर्वे में पहले पायदान पर पहुंचने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए छह तरह के कूड़े को वैज्ञानिक पद्धति से निपटाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। पहला, घरेलू कूड़े को निस्तारित करने का काम अस्तौली में शुरू हो चुका है। दूसरा, निर्माण सामग्री के अवशेष के लिए ईकोटेक-3 में प्लांट बनाया जाना है। तीसरा, लखनावली में रेमेडियन प्लांट लगाने पर काम चल रहा है। चौथा, प्लास्टिक वेस्ट के लिए रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (आरटीएफ) प्लांट भी अस्तौली में बनाया जाएगा। पांचवां, बायो मेडिकल वेस्ट पहले से ही मेरठ स्थित प्लांट भेजा जा रहा है। इसे और व्यवस्थित करने की योजना है। छठा इलेक्ट्रॉनिक्स वेस्ट को एकत्र के लिए प्रमुख सेक्टरों में केंद्र बनाएं जाएंगे। इन सभी योजनाओं पर अगले एक साल में काम शुरू करने का लक्ष्य है। सेनेटरी लैंडफिल साइट से निपटेगा घरेलू कूड़ा
बिलासपुर स्थित सेनेटरी लैंडफिल साइट करीब 56 हेक्टेयर में बन रहा है। इसकी दीवार बन चुकी है। इसके डिजाइन को अंतिम रूप दिया जा रहा है। ग्रेटर नोएडा से रोज करीब 150 टन कूड़ा निकलता है। इसमें से 90 फीसदी कूड़े को री-साइकिल करने की योजना है।
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निर्माण से जुड़े वेस्ट से बनेगी इंटरलॉकिंग टाइल्स
ग्रेटर नोएडा में बिल्डिंग निर्माण होते रहते हैं। इनसे निकलने वाले कूड़े को गड्ढों में डंप किया जाता है। प्राधिकरण सेक्टर ईकोटेक थ्री में कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलेशन वेस्ट प्लांट बनाने जा रहा है। इसके बाद इस तरह के सभी वेस्ट इसी प्लांट में जाएंगे। जहां इंटरलॉकिंग टाइल्स व ईंट बनाई जाएगी।
लखनावली में बनेगा रेमेडियन प्लांट
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण लखनावली में रेमेडियन प्लांट बना रहा है। यहां डंप कूड़े के ऊपर पार्क बनाएगा। नोएडा के सेक्टर-54 में इसी तरह का प्लांट मौजूद है। इसे हरा-भरा किया जाएगा। इससे आसपास के लोग यहां आकर सैर भी कर सकेंगे।
अस्तौली में ही बनेगा एमएसडब्ल्यूए प्लांट
बिलासपुर स्थित अस्तौली में म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट के लिए रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल प्लांट भी बनाया जाएगा। इसकी रिपोर्ट तैयार करने के लिए सरकारी एजेंसी का चयन किया गया है। पैकिंग मैटेरियल इसी तरह के वेस्ट में आता है। इस वेस्ट का इस्तेमाल रोड बनाने में भी हो सकता है।
बायो मेडिकल वेस्ट पर और सख्ती होगी
ग्रेटर नोएडा से बायोमेडिकल वेस्ट फिलहाल मेरठ भेजा जाता है। एक विशेषज्ञ एजेंसी से यहां के अधिकांश अस्पताल व नर्सिंग होम संचालकों ने संपर्क कर रखा है। वहीं मेडिकल वेस्ट निस्तारित किया जाता है। प्राधिकरण इस प्रक्रिया को सभी अस्पताल पर सख्ती से लागू करना चाहता है। इसके लिए बनी नीति में और शर्तें जोड़ी जाएंगी।
ई वेस्ट के लिए बनेंगे कलेक्शन केंद्र
ग्रेटर नोएडा में ई वेस्ट के लिए कुछ ही कलेक्शन केंद्र ही चल रहे हैं। प्राधिकरण मोबाइल विक्रेताओं से संपर्क कर सभी प्रमुख जगहों पर ई वेस्ट से जुड़े कलेक्शन केंद्र बनाने जा रहा है। यहां लोग अपने पुराने फोन व अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स सामान भेज सकेंगे। यहां ई वेस्ट का निस्तारण किया जाएगा।
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भारत सरकार के अगले स्वच्छता सर्वेक्षण में ग्रेटर नोएडा को शामिल कराने की पूरी कोशिश की जा रही है। इसमें जन सहभागिता की भी जरूरत है। तभी ग्रेटर नोएडा को पहले पायदान पर लाया जा सकता है।
- नरेंद्र भूषण, सीईओ, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण
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