- सुप्रीम कोर्ट ने दिया है आदेश तीन आईपीएस करेंगे जांच, 20 प्रकरण में 117 करोड़ रुपये मुआवजा ज्यादा देने की है गड़बड़ी
- अब तत्कालीन अधिकारी व उनके परिजनों के बैंक खाते भी जांच के दायरे में, एफआईआर भी करवा चुका है प्राधिकरण
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण से मुआवजा बांटने में हुई अनियमितता की जांच को अब तीसरी बार स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की जांच होगी। मुआवजा घोटाला गेझा तिलपताबाद व भूड़ा गांव में कोर्ट केस में सेटलमेंट के नाम पर किया गया था। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तीसरी एसआईटी जांच का होना तय हो गया है। इसके पहले भी दो बार एसआईटी इस मुआवजे घोटाले की जांच कर चुकी है।
पहली एसआईटी बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के चेयरमैन की अध्यक्षता में बनी थी। वहीं दूसरी एसआईटी तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की बनाई गई थी। तीसरी एसआईटी भी तीन आईपीएस अधिकारियों की बनेगी। पहले हुई दोनों एसआईटी की जांच में यह फर्जीवाड़ा उजागर हो चुका है। यह सामने आ चुका है कि जिन किसानों को 93.75 रुपये प्रति वर्गमीटर मुआवजा दिया जाना था कोर्ट सेटलमेंट के नाम पर उनको 297 रुपये प्रति वर्गमीटर मुआवजा दिया गया।
वर्ष 2009- 2023 के बीच 20 किसानों से कोर्ट केस के नाम पर बाहर सेटलमेंट के नाम पर करीब 117 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया। दोनों बार हुई जाचं में वर्ष 2009-10 से लेकर 2022-023 के बीच कोर्ट सेटलमेंट व अन्य सेटलमेंट के नाम पर 1186 प्रकरण में दिए गए मुआवजे की फाइलें खंगाली गई। जिसमें गेझा तिलपताबाद में 12 और भूड़ा गांव के 8 प्रकरण में ज्यादा मुआवजा देने की बात सामने आई है। यही प्रकरण अब तीसरी बार फिर खंगाले जाएंगे। दूसरी एसआईटी की तरफ से भी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में रखी जा चुकी है।
वर्ष 2021 में सामने आया था फर्जीवाड़ा
नोएडा के गांवों में मुआवजा बांटने में गड़बड़ी खुलासा वर्ष 2021 में गेझा तिलपताबाद गांव में हुआ था। अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश न्यायालय ने एक मामले में दिया था। फिर 2014-015 में प्राधिकरण के अफसरों ने उस आदेश का हवाला देकर यह लाभ अन्य किसानों को भी दे दिया। जांच शुरू हुई तो अन्य मामले सामने आए। प्रकरण सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने 14 सितंबर 2023 को नोएडा प्राधिकरण व शासन को फटकार लगाते हुए कहा था कि यह गड़बड़ी सिर्फ विधि अधिकारी स्तर के नहीं कर सकते। इसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए। कोर्ट की फटकार के बाद इस मामले में प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया था। वहीं प्राधिकरण स्तर पर तीन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ पूर्व में एफआईआर करवाने और आरसी जारी करने की कार्रवाई भी हुई है।
इस बार तत्कालीन अधिकारियों व उनके परिवार के बैंक खातों तक पहुंच सकती है जांच
तीसरी एसआईटी जो जांच करेगी इसका काम तत्कालीन प्राधिकरण अधिकारियों की मिलीभगत को खंगालने का होगा। इस दौरान अधिकारियों व उनके परिवार के बैंक खातों तक भी जांच पहुंच सकती है। बैंक खातों को लेनदेन की जांच में खंगाला जाना है।