लापरवाही की हद देखिए कि एक गांव के वृद्ध को दस्तावेजों में मृत दर्शा दिया जाता है और उसी के आधार पर वृद्धा पेंशन भी रोक दी जाती है। जब कई माह तक पेंशन नहीं आई तो ग्रेटर नोएडा में दनकौर ब्लाक के महमूदपुर गुजरान गांव निवासी ब्रह्म सिंह(77) बैंक जाते हैं और वहां पता चलता है कि उनको मृत घोषित कर दिया गया है। बुजुर्ग उपजिलाधिकारी से लेकर जिलाधिकारी और समाज कल्याण विभाग के समक्ष जाकर अपने आप को जिंदा बताता है। मगर अधिकारी आश्वासन देकर हर बार चलता कर देते हैं। बुजुर्ग अपने आपको जिंदा साबित करने के लिए 15 माह तक विभाग के दफ्तर में जूती घिसता है तब जाकर पेंशन चालू की जाती है।
बुजुर्ग 15 महीने की रुकी पेंशन पाने के लिए अभी भी अफसरों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे है।पीड़ित ब्रह्म सिंह ने बताया कि वह इधर-उधर काम करके किसी तरह परिवार का भरण पोषण कर रहे थे। उम्र अधिक होने पर अब काम भी नहीं होता है। पांच साल से उसको पांच सौ रुपये हर महीने वृद्धा पेंशन मिलती थी। करीब डेढ़ साल पहले अचानक पेंशन आनी बंद हो गई।
पेंशन नहीं आने पर उसने विभाग से संपर्क किया। वहां से जानकारी मिली की उसके मृत होने की रिपोर्ट लेखपाल ने भेजी है। इस रिपोर्ट के बाद उसके मृत होने पर पेंशन बंद कर दिया है।15 महीने तक खुद को जिंदा साबित करने के लिए विभाग के चक्कर लगाता रहा तो किसी तरह अधिकारियों ने जीवित समझा।अब तीन माह की पेंशन उनके खाते में आई है। बुजुर्ग ने बताया कि 15 महीने की बकाया पेंशन राशि के लिए लगातार जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर लगा रहा है।
सर्वे के दौरान लेखपाल की रिपोर्ट मृत आने पर पेंशन के खाते को ब्लॉक कर दिया गया था। विभाग को व्यक्ति के जिंदा होने की सूचना पर उसको अनब्लॉक करके पेंशन शुरू करा दी है। इस तरह के और भी मामले आए हैं।
शैलेंद्र कुमार सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी