सिद्धार्थनगर। पितृ पक्ष शुरू होते ही बाजार से ग्राहकों की रौनक गायब हो चुकी है। ग्राहकों से भरा रहने वाला शहर का बाजार अब ग्राहकों के नहीं आने से सन्नाटा छाया रहेगा, जिन दुकानों पर सुबह से लेकर शाम तक भीड़ रहती थी, वहां पर भी लोग अब नवरात्र शुरू होने के बाद खरीदारी करेंगे।
पहले दिन ही दुकान पर ग्राहक नजर नहीं आए। ऐसे में अब दुकानदारों को नवरात्र पर्व का इंतजार है। पौराणिक मान्यता है कि जब श्राद्ध शुरू होते हैं तो उस दौरान कोई भी नई चीज या वस्तु खरीदना शुभ नहीं माना जाता है। इसके चलते लोग श्राद्ध पक्ष के दौरान वस्तुओं की खरीद-फरोत करने से परहेज करते हैं। इसका असर व्यापार पर दिख रहा है। चाहे इलेक्ट्राॅनिक सामान हो, कपड़ा या गिफ्ट आइटम या सोने और चांदी के गहने सभी दुकानों पर सन्नाटा रहा।
शहर की सभी दुकानों, शोरूमों पर ग्राहकों की भरमार रहती थी, लेकिन अब वहां भी रविवार को ग्राहकों का इंतजार करना पड़ेगा। पितृपक्ष के चलते लोग खरीदारी नहीं करेंगे। ऐसे में दुकानदारों को इंतजार है कि किसी तरह पितृपक्ष का समय निकले और नवरात्र महोत्सव शुरू हो, जिससे दुकानों की रौनक फिर बढ़ सके।
दुकानदारों के अनुसार श्राद्ध के दिनों में लोग कोई भी नई चीज नहीं खरीदते हैं, इसीलिए इन दिनों में कई बार ऐसा होता है कि दुकानदारों की बोहनी तक नहीं होती है। हालांकि जो लोग इन बातों को नहीं मानते हैं या नई सोच वाले हैं वह जरूर कुछ सामान खरीद लेते हैं, लेकिन श्राद्ध के दिनों में खरीदारी नहीं के बराबर है। श्राद्ध की वजह से धंधा बिल्कुल ही मंदा रहता है।
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पितृ पक्ष के दौरान कुछ समय के लिए टल जाते हैं शुभ कार्य
आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य ने बताया कि इस साल श्राद्ध पक्ष 15 के बजाय 14 दिन के रहने वाले हैं। अमावस्या का श्राद्ध और तर्पण अंतिम होगा। उसके बाद नवरात्र शुरू हो जाएंगे। ऐसे में पितृ पक्ष के दौरान कुछ समय के लिए शुभ कार्यों को टाला जाता है। पितृ पक्ष में पितरों से निमित्त पिंडदान की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।