- अदालत ने कहा अभियोजन पक्ष सबूत जुटाने में था विफल
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अपर सत्र न्यायाधीश प्रियंका सिंह की अदालत ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवती से दुष्कर्म और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों से दिल्ली निवासी साथी कर्मी सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकुश गढ़ोत्रा को बरी कर दिया। अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे साबित करने में विफल रहा और न तो दुष्कर्म का सबूत जुटा पाया और न ही यह साबित कर पाया कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने मृतका को आत्महत्या के लिए उकसाया।
मामला वर्ष 2017 का है। युवती के पिता ने सेक्टर 58 कोतवाली में केस दर्ज कराया था कि उसकी पुत्री सेक्टर 62 स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थी। इसी कंपनी में अंकुश गढ़ोत्रा भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर के सीनियर पद पर कार्यरत है। अंकुश गढ़ोत्रा पर उसकी सहकर्मी के साथ दुष्कर्म करने और फिर उसे आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगा था। आरोपों के मुताबिक अंकुश ने युवती से शादी का झांसा देकर दो साल तक शारीरिक संबंध बनाए और जब वह गर्भवती हो गई, तो उसका गर्भपात करवा दिया।
परेशान होकर 9 जून 2017 को युवती ने अपने सेक्टर 62 नोएडा स्थित आवास में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। युवती ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा था, जिसमें अंकुश और उसके परिवार को जिम्मेदार ठहराया गया था। युवती ने सुसाइड नोट में लिखा था कि अंकुश गंडोत्रा और उसका परिवार उसकी मौत के लिए जिम्मेदार हैं। अंकुश ने शादी का वादा किया था। उसने दो साल तक यौन संबंध बनाए और गर्भवती कर दिया। पुलिस ने मामले में सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया था।
करीब आठ साल तक मामला अदालत में चला। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सुसाइड नोट में आरोपी का नाम होना मात्र दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं है। इसी तरह दुष्कर्म के आरोप के संबंध में अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने शादी का झांसा देकर या जबरदस्ती युवती के साथ शारीरिक संबंध बनाए। सबूतों के अभाव में अदालत ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर को सभी आरोपों से भी दोषमुक्त कर दिया।