शारदा नदी के कटान के बाद मलबे में तब्दील मकानों की स्थिति।संवाद
निघासन। निघासन और फूलबेहड़ सीमा पर बसा ग्रंट नंबर 12 गांव नक्शे से गायब होने के कगार पर पहुंच गया है। शुक्रवार देर रात से शुरू हुए कटान ने शनिवार को और भयावह रूप धर लिया। नदी की तेज धारा में गांव के आठ और मकान समा गए।
शनिवार को मनीता देवी, संकटा, जगदंबा प्रसाद, प्यारा देवी, रामकृपाल, पुष्पा देवी, दिनेश कुमार और उत्तम के घर शारदा की लहरों में बह गए। इस प्रकार अब तक 112 मकान नदी की धारा में समा चुके हैं। हालात यह हैं कि पीड़ित परिवार सड़क किनारे डेरा डालकर खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के लिए मजबूर हैं। कटान की तीव्रता का अनुमान ऐसे ही लगता है कि बुधवार, बृहस्पतिवार, शुक्रवार और शनिवार को 38 घर बाढ़ कटान की भेंट चढ़ चुके हैं।
पीड़ितों का कहना है कि लगातार हो रहे कटान से सैकड़ों एकड़ जमीन नदी में समा चुकी है। गृहस्थी का सामान, अनाज और मवेशियों का चारा सब कुछ नदी की धारा में बह गया। बच्चों की परवरिश और मवेशियों का पालन करना परिवारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार प्रशासन से कटान रोकने के लिए गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
तहसीलदार मुकेश वर्मा का कहना है कि 53 पीड़ितों के खातों में मुआवजे की राशि भेज दी गई है, जिसमें 48 पक्के मकान के लिए एक लाख 20 हजार और पांच झोंपड़ी वालों को आठ हजार रुपये लाभार्थियों के खाते में भेजे जा चुके हैं। बाकी लाभार्थियों के खातों में धनराशि भेजने की प्रक्रिया चल रही है।