-अनुपम खेर की आवाज में डॉक्यूमेंट्री, राजस्थानी-केरल कला से अतिथियों का स्वागत
-अमित शाह करेंगे विठ्ठलभाई पटेल की गौरव गाथा प्रदर्शनी का उद्घाटन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
विधानसभा में 24-25 अगस्त को होने वाली अखिल भारतीय स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस में शहीद भगत सिंह से जुड़े गोपनीय दस्तावेज प्रदर्शित होंगे। खास तौर पर उनका मूल मृत्यु प्रमाण पत्र और मृत्यु वारंट पहली बार प्रदर्शित होगा। इसमें 8 अप्रैल 1929 को उनके बम कांड और 23 मार्च 1931 की फांसी की घटनाएं दर्ज हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विठ्ठलभाई पटेल की गौरव गाथा प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। ये आयोजन भारत के पहले निर्वाचित स्पीकर विठ्ठलभाई पटेल की शताब्दी वर्ष पर जश्न के उपलक्ष्य में होगा।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 24-25 अगस्त को होने वाली ऑल इंडिया स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस में देशभर से 29 विधानसभा अध्यक्ष, 17 उपाध्यक्ष, 6 विधान परिषद चेयरमैन और 4 डिप्टी चेयरमैन शामिल होंगे। ये आयोजन विठ्ठलभाई पटेल के केंद्रीय विधानसभा के पहले भारतीय स्पीकर बनने के 100 साल पूरे होने की याद में हो रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उद्घाटन करेंगे और एक विशेष डाक टिकट भी जारी करेंगे। समापन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला करेंगे। आयोजन की तैयारी पूरी हो गई हैं।
इतिहास के दुर्लभ दस्तावेज दिखेंगे
प्रदर्शनी में विठ्ठलभाई पटेल के दुर्लभ दस्तावेज, फोटो और संसदीय योगदान दिखाए जाएंगे। महात्मा गांधी के विधानसभा दौरे, साइमन कमीशन का विरोध और रॉलेट एक्ट के खिलाफ संघर्ष भी प्रदर्शनी का हिस्सा होंगे। ये प्रदर्शनी 26 से 31 अगस्त तक जनता के लिए खुली रहेगी।
सम्मेलन में चार सत्र होंगे
पहला सत्र पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, दूसरा राज्यसभा उपसभापति हरिवंश नारायण, तीसरा केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और चौथा केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर संबोधित करेंगे। अनुपम खेर की आवाज में एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई जाएगी, जो भारत के लोकतांत्रिक सफर को दर्शाएगी।
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पारंपरिक तरीके से होगा अतिथियों का स्वागत
सभी अतिथियों का स्वागत राजस्थानी कच्छी घोड़ी, हरियाणवी बंचारी नगाड़ा, पूर्वोत्तर और केरल के चेंडा वादन से होगा। 125 लायजन ऑफिसर और कड़ी सुरक्षा के साथ अतिथियों को राज्य अतिथि का दर्जा दिया जाएगा। विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राहुल गांधी और कई मुख्यमंत्रियों ने इस आयोजन को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि ये सम्मेलन भारत की संसदीय विरासत को मजबूत करेगा। इकलौती पश्चिम बंगाल विधानसभा है, जिसने अखिल भारतीय स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस में शामिल होने से मना कर दिया है।