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Noida News: जर्जर ढांचे पर बढ़ेगा 300 मेगावाट बिजली का भार

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सुधार के लिए मुख्यालय को भेजे गए 200 करोड़ के प्रस्ताव पर सहमति नहीं मिल सकी
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जिले में बिजली के जर्जर ढांचे पर इस साल मई-जून में करीब 300 मेगावाट बिजली का अतिरिक्त भार बढ़ जाएगा। ऐसे में शहर के उपभोक्ताओं को बड़े स्तर पर कटौती का सामना करना पड़ेगा। पिछले साल आपूर्ति की मांग 2000 मेगावाट तक पहुंच गई थी। इस साल 2023 के गर्मियों में करीब 15 प्रतिशत तक आपूर्ति की मांग में इजाफा हो सकता है। इसे देखते हुए विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जर्जर ढांचे के विकास के लिए मुख्यालय को करीब 200 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर सितंबर में भेज चुके हैं। इस प्रस्ताव पर अभी तक सहमति नहीं मिल सकी है। फरवरी के मध्य से गर्मी की आहट शुरू हो जाएगी, जिससे बिजली विभाग के अधिकारियों को निर्बाध आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखने की चिंता भी सताने लगी है।
हर साल बढ़ते तापमान को देखते हुए बिजली आपूर्ति की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए विभाग ने सितंबर 2022 से ही प्रयास शुरू कर दिए थे। बता दें कि जिले में 1400 मेगावाट तक बिजली के लोड क्षमता की लाइनें हैं। साल 2022 के मई-जून में बिजली की मांग करीब 2000 मेगावाट तक पहुंच गई। करीब 600 मेगावाट के ओवरलोड के कारण पूरे सीजन बिजली विभाग के कर्मचारी फॉल्ट दूर करने में दौड़ते भागते दिखाई दिए। इसके बाद सितंबर में आगामी साल की कार्ययोजना बनाकर क्षतिग्रस्त लाइनों व उपकेंद्र की मरम्मत समेत बिजली आपूर्ति से जुड़े अन्य संसाधनों पर खर्च करने के लिए 200 करोड़ का प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया। अभी तक इस पर सहमति नहीं बन पाई है।
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इन सेक्टरों में होगा काम


- 50 बिजली उपकेंद्रों की क्षमता में वृद्धि।

- 40 जर्जर बिजली लाइनों की क्षमता में वृद्धि।

- 40 स्थानों पर नई रबड़ युक्त (एबीसी) केबल डालने का कार्य।

- 50 से अधिक जर्जर पैनल बॉक्स बदले जाएंगे।
- 80 ट्रांसफार्मर की क्षमता में वृद्धि।

- मीटर बॉक्स बदलने का काम।



मार्च 2023 से पहले मरम्मत कार्य पूरा करने का लक्ष्य
मई-जून में भीषण गर्मी के दौरान बिजली की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए विभाग के अधिकारियों ने मार्च 2023 तक मरम्मत कार्य को पूरा करने का लक्ष्य रखा। अभी तक प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनने के कारण मार्च तक मरम्मत कार्य पूरा होने में संशय है।
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गर्मियों में उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति के लिए बिजली ढांचे को सुधारना बेहद जरूरी है। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर मेरठ मुख्यालय को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
-जेबी सिंह, मुख्य अभियंता, विद्युत निगम
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