स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने वाले अपने सदस्य के खिलाफ पांच लाख रुपये के मुचलके का नोटिस जारी करने वाले ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट के निलंबन का स्वागत किया है। संगठन ने इसे पूरे छात्र समुदाय की जीत बताया है।
यह नोटिस एसएफआई की उत्तर प्रदेश राज्य समिति के सदस्य अक्षत त्रिपाठी को जारी किया गया था। एसएफआई का आरोप है कि प्रदर्शन में शामिल होने के कारण छात्र के खिलाफ की गई यह कार्रवाई उच्चतम न्यायालय के उस निर्देश के विरुद्ध थी, जिसमें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने को कहा गया था।
एसएफआई ने कहा कि वह मजिस्ट्रेट के निलंबन को छात्र समुदाय और लोकतांत्रिक ताकतों की जीत मानता है। संगठन ने इस अभियान में सहयोग करने वाले छात्र संगठनों, कानूनी टीमों और अन्य लोगों का आभार जताया। संगठन ने आरोप लगाया कि छात्र के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई सत्ता के अत्यधिक और अलोकतांत्रिक इस्तेमाल को दर्शाती है। एसएफआई ने लोकतांत्रिक संगठनों और लोगों से कार्यपालिका के कथित अतिक्रमण का विरोध करने की अपील की।
देशभर में दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग
एसएफआई ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ मामले वापस लेने के निर्देश का वह स्वागत करता है। हालांकि, संगठन ने मांग की कि नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ देशभर में हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामले भी वापस लिए जाएं। एसएफआई के अनुसार, संगठन ने 12 मई को शिक्षा मंत्रालय तक मार्च निकाला था। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने उसके करीब 25 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ मामले दर्ज किए।
संगठन का दावा है कि नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ देशभर में एक हजार से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन किए गए। इन प्रदर्शनों के दौरान 800 से अधिक छात्रों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 16 छात्र नेताओं को जेल भेजा गया। एसएफआई ने कहा कि उसने अन्य छात्र संगठनों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन के पहले दिन से ही जंतर-मंतर पर आंदोलन में भाग लिया था।
संगठन ने नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों के विरुद्ध दर्ज सभी मामलों को वापस लेने की मांग दोहराई। एसएफआई ने स्पष्ट किया कि जब तक उसकी यह मांग पूरी नहीं होती, तब तक उसका आंदोलन जारी रहेगा।