जिला उपभोक्ता आयोग
साक्ष्य के अभाव में अधूरा मकान पूरा कराने की रकम नहीं मिली
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। मकान के नवीनीकरण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल करने और कई काम अधूरे छोड़ने के आरोपों को साबित करने के लिए शिकायतकर्ता की ओर से पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके। इसके चलते जिला उपभोक्ता आयोग ने नवीनीकरण के लिए दी गई धनराशि वापस दिलाने के लिए दायर वाद को निरस्त कर दिया।
आयोग में गाजियाबाद के इंदिरापुरम् निवासी अनिल वीर ने नोएडा निवासी अक्षय शर्मा की मकान निर्माण और नवीनीकरण संबंधी सेवाएं देने वाली कंपनी के खिलाफ शिकायत की थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, 29 सितंबर 2023 को मकान का डिजाइन तैयार कराया गया था। इसके लिए एक लाख रुपये का भुगतान किया। इसके बाद 15.62 लाख रुपये में मकान का नवीनीकरण कार्य पूरा करने की बात तय हुई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि नवीनीकरण कार्य के लिए मकान खाली कर दिया गया था। 29 मई 2024 को काम शुरू किया गया, लेकिन काम की गति काफी धीमी रही। इसके चलते निर्धारित समय में काम पूरा नहीं हो सका और उसे किराये के मकान में अधिक समय तक रहना पड़ा।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि समझौते में तय सामग्री के बजाय घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, अधूरे और खराब तरीके से किए गए काम को पूरा कराने के लिए दूसरे ठेकेदार की मदद लेनी पड़ी। इसके लिए 4.80 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े। शिकायतकर्ता ने इस राशि समेत अन्य नुकसान की भरपाई और पहले दी गई धनराशि वापस कराने की मांग की थी।
जिला उपभोक्ता आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया। आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता की ओर से किसी विशेषज्ञ की रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई, जिससे यह साबित हो सके कि मकान में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। आयोग ने कंपनी की सेवा में कमी स्पष्ट रूप से साबित नहीं होने के कारण धनराशि वापस कराने के लिए दायर वाद को निरस्त कर दिया।