मथुरा। पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। बृहस्पतिवार को छाता, मांट, नौहझील और सदर समेत कई क्षेत्रों में पराली जलाने वालों पर कार्रवाई हुई है। प्रशासनिक टीमों का विरोध करने पर पांच किसानों को जेल भेजा गया है, छह को पाबंद किया है। वहीं एक किसान पर केस दर्ज कराया है। वाहन भी जब्त किए हैं। डीएम ने निर्देश दिए हैं कि निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
डीएम चंद्रप्रकाश सिंह ने कहा कि सभी संबंधित अधिकारी, कर्मचारी गांव-गांव जाकर किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक करें। किसानों को बताएं कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरक क्षमता कम होती है। वातावरण में धुआं फैलने से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। साथ ही पराली को नष्ट करने के बजाय उसे खाद बनाने या मशीनों की मदद से खेत में ही दफन करने का विकल्प अपनाएं। बृहस्पतिवार को छाता में तीन, मांट के नौहझील खादर व बांगर में एक-एक, गोवर्धन में तीन किसानों पर पराली जलाने के मामले में कार्रवाई कर जुर्माना लगाया है।
साथ ही जैंत के तोष गांव में पप्पी व लाखन पर भी एसडीएम सदर अभिनव जे जैन ने कार्रवाई की है। इधर, प्रशासन ने पराली की घटनाओं की निगरानी के लिए टीमें गठित की हैं, जो ड्रोन, फील्ड विजिट के साथ-साथ सैटेलाइट के माध्यम से स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। डीएम ने कहा कि अगर कोई पराली बेचना चाहता है तो वह प्रशासन से संपर्क करें। किसानों से पराली खरीदकर गायों के लिए गोशालाओं में भिजवाया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।