रक्षा उपकरण कंपनी से तकनीक हासिल कर सात करोड़ की धोखाधड़ी
कंपनी के निदेशकों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। रक्षा क्षेत्र में काम करने वाली एमट्रेक्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने मेसर्स क्विक पे प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों पर हथियार बनाने की तकनीक हासिल कर सात करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने आरोपी कंपनी के निदेशक राजीब रॉय, मनोशी रॉय एवं राकेश कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू की है।
साइट-4 स्थित एमट्रेक्स टेक्नोलॉजी के निदेशक असीम यादव का कहना है कि उनकी कंपनी रक्षा उपकरणों के स्वदेशी विकास और निर्माण में 17 वर्षों से काम कर रही है और उसके पास रक्षा औद्योगिक लाइसेंस (डीआईएल) है। 17 फरवरी 2025 को भारतीय सेना के इन्फैंट्री महानिदेशालय (इन्फ-7) ने 190 वीटीओएल लोइटर म्यूनिशन सिस्टम की खरीद के लिए प्रस्ताव जारी किया था। इसके बाद क्विक पे प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि मई-2025 में एमट्रेक्स टेक्नोलॉजीज के ग्रेटर नोएडा स्थित संयंत्र पर पहुंचे और साझेदारी का प्रस्ताव रखा। आरोप है कि क्विक पे कंपनी के पास न तो रक्षा निर्माण का अनुभव था न तकनीकी योग्यता और न ही विनिर्माण की क्षमता। बावजूद झूठे वादे कर उन्होंने एमट्रेक्स से हथियार की डिजाइन, इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर और प्रोटोटाइप हथियारयुक्त ड्रोन की तकनीकी और विशेषज्ञता हासिल कर ली।
क्विक पे ने 10 मई 2025 को एक क्रय आदेश जारी कर 40 लाख 36 हजार 780 रुपये की खरीद का भरोसा दिलाया था, लेकिन आज तक कोई क्रय नहीं किया गया। क्विक पे ने एमट्रेक्स से वादा किया था कि भविष्य की सभी आपूर्ति और लाभांश उसी कंपनी को मिलेंगे लेकिन सेना से अनुबंध प्राप्त होते ही आरोपी कंपनी ने संपर्क बंद कर दिए गए। आरोपियों ने झूठे दस्तावेज और फर्जी लाइसेंस दिखाकर रक्षा मंत्रालय को भ्रमित किया और सेना के समक्ष एमट्रेक्स द्वारा विकसित किए गए अत्याधुनिक ड्रोन को अपनी तकनीक बताकर प्रस्तुत किया। असीम यादव का कहना है कि अगर क्विक पे कंपनी अनुबंध पूरा करने की कोशिश करती है तो वह घटिया गुणवत्ता वाले पुर्जे लगाएगी या फिर अवैध रूप से विदेश से प्रतिबंधित तकनीक का आयात करेगी।
एमट्रेक्स का दावा, परियोजना के लिए किया भारी निवेश
एमट्रेक्स का दावा है कि उसने इस परियोजना के लिए भारी निवेश किया है। हथियारों के अनुसंधान, प्रोटोटाइप विकास, क्षेत्रीय परीक्षण, हथियारों की खरीद और अन्य संसाधनों पर कंपनी ने लगभग 7 करोड़ रुपये खर्च किए जो अब तक बकाया हैं। कई विक्रेताओं को भी भुगतान नहीं हो पाया है। आरोपियों को सौंपे गए प्रोटोटाइप और डिजाइन में अत्याधुनिक एवं गोपनीय तकनीक का इस्तेमाल हुआ था, जिसका गलत हाथों में जाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक है।
वहीं कोतवाली पुलिस का कहना है कि बीएनएस की धारा-316 (4) (आपराधिक विश्वासघात), 318 (4) (धोखाधड़ी), 338 (मूल्यवान प्रतिभूति, वसीयत या किसी भी दस्तावेज की जालसाजी), 336 (3) (जालसाजी), 340 (2) (जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को असली के रूप में उपयोग करने), 61 (2) (दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा किसी अपराध या अवैध कार्य को करने की धाराओं में कंपनी निदेशकों व अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।