सिर्फ अयोध्या नहीं, कश्मीर में भी ढूंढे प्राचीन साक्ष्य
डॉ. मणि ने अपने करियर में देश के 20 से अधिक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों पर उत्खनन का निर्देशन किया। दिल्ली के लाल कोट और सलीमगढ़, हरियाणा के कुणाल, उत्तर प्रदेश के संकिसा और सिसवनिया तथा जम्मू-कश्मीर के अंबारन जैसे स्थलों पर किए गए उत्खनन उनके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं। वर्ष 2003 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के आदेश पर उनके निर्देशन में अयोध्या के विवादित स्थल पर उत्खनन कराया गया। इस उत्खनन में प्राप्त उत्तर भारतीय नागर शैली के अवशेष, स्तंभों के अधिष्ठान और अभिलेख न्यायिक प्रक्रिया में निर्णायक साबित हुए, जिनके आधार पर आज भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण संभव हो सका।
अब तक मिले सम्मान
- लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड कनफेडरेशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (2017)
- शारदा शताही समान ( 2023)
- जय श्री सत्य बालाजी संकट मोचन अभिनन्दन, गोरखपुर, ( 2023)
- मंजू शुरू सम्मान, भारतीय बौद्ध अध्ययन समाज द्वारा दिया गया ( 2023)
पद्मश्री की घोषणा के बाद अमर उजाला से क्या बोले डॉ. मणि
'मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि सरकार ने मेरे कार्यों को पहचान दी और मुझे इस काबिल समझा। मै सरकार का आभारी हूं। भारतीय इतिहास बहुत प्राचीन, एक अथाह सागर जैसा है, अभी बहुत कुछ खोजना और जानना बाकी है।'