सोनभद्र/दुद्धी। एक तरफ जहां अवैध तरीके से संचालित अस्पताल ने जच्चा-बच्चा की जान ले ली। वहीं तीन बार अस्पताल सील किए जाने और दो बार एफआईआर के लिए तहरीर दिए जाने के बाद भी किसके संरक्षण-इशारे पर अस्पताल चलता रहा? इसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। अब चौथी बार अस्पताल सील हुआ है लेकिन घटना के 24 घंटे बाद भी सरकारी तंत्र को ठेंगा दिखा रहे अस्पताल संचालक पर कोई कड़ी कार्रवाई सामने नहीं आ पाई है।
बताते चलें कि बुधवार को दुद्धी तहसील मुख्यालय पर देव हास्पिटल एंड फ्रैक्चर सेंटर का बोर्ड लगाकर संचालित हो रहे अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत हुई थी। इस पर परिजनों और ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया था। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर अस्पताल सील कर दिया था। छानबीन में पता चला कि अस्पताल पंजीकृत नहीं था। इसकी ओटी को पहले भी तीन बार सील किया गया था।
एफआईआर के लिए दो बार तहरीर भी दी गई थी। बावजूद यह ऐसे जगह बेध़ड़क संचालित होता था जहां प्रशासनिक-पुलिस के साथ स्वास्थ्य महकमे के अफसर (सीएचसी अधीक्षक) की मौजूदगी बनी हुई है। सीएचसी अधीक्षक को स्थानीय स्तर पर नोडल का दर्जा हासिल है। जिले स्तर से भी समय-समय पर निगरानी का दावा किया जाता है। पिछले माह ही चेकिंग अभियान चलाया गया था।
वर्जन
पीड़ित पक्ष से कहा गया है कि वह पुलिस को तहरीर देने के साथ एक प्रार्थनापत्र स्वास्थ्य विभाग को भी उपलब्ध कराए। ऐसी कार्रवाई की जाएगी कि पूरे जिले में कहीं भी इस तरह से अस्पताल खोलकर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ न करने पाएं। -डॉ. पीके राय, सीएमओ सोनभद्र।
-
सीएमओ की जांच रिपोर्ट के बाद पुलिस विधिक कार्रवाई करेगी। परिजनों की ओर से कोई तहरीर नहीं मिली है। अगर वह तहरीर देते हैं तो मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। -राजेश राय, सीओ दुद्धी।