- कब्जे से सीपीयू, डेस्कटॉप, राउटर, माउस, की-बोर्ड, हैडफोन, मोबाइल बरामद
- गुजरात, राजस्थान और कर्नाटक के रहने वाले हैं आरोपी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सेक्टर-142 कोतवाली ने अमेरिका नागरिकों के साथ धोखाधड़ी करने वाले अवैध कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अहमदाबाद गुजरात निवासी मास्टरमाइंड मंसूरी (26), सिरोही राजस्थान निवासी तरुण मिश्रा (39), करवर कर्नाटक निवासी चन्द्रकांत (39) के रूप में हुई है। आरोपियों से 9 सीपीयू, 9 डेस्कटॉप, एक राउटर, 9 माउस, 9 की-बोर्ड, 9 हेडफोन और 4 आईफोन बरामद हुए हैं। आरोपी पिछले डेढ़ माह में 50 से अधिक लोगों से करीब 30 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर चुके हैं।
डीसीपी सेंट्रल नोएडा शैलेंद्र सिंह ने बताया कि बुधवार रात को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर सेक्टर-138 स्थित एक इमारत की तीसरी मंजिल पर दबिश दी। दबिश के दौरान मौके से अवैध व फर्जी कॉल सेंटर का संचालन करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। तीनों आरोपी फर्जी पहचान बताकर और विदेशी ई सिम कार्ड व कंप्यूटर-मोबाइल के माध्यम से अमेरिकी लोगों के साथ धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे थे।
अमेरिका के लोगों का रखते थे डेटा : आरोपियों के पास से पहले से उन लोगों का डेटा होता था। जिन्होंने अमेरिका के बैंकों से लोन लिया, लेकिन वह लोन समय पर नहीं चुका पाने के कारण वह डिफॉल्टर हो गए। इसके बाद आरोपी फर्जी कॉल सेंटर से मैसेज व फोन के माध्यम से अंग्रेजी में अमेरिकी नागरिकों संपर्क करते थे। अमेरिकी नागरिकों से बात करने के लिए विदेशी ई सिम कार्ड और कंप्यूटर-मोबाइल उपकरणों के माध्यम से संपर्क किया जाता था। जिससे अमेरिकी नागरिकों को लगे के फोन उनके देश में बैठे व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है। आरोपी अमेरिकी नागरिकों से कहते थे कि वह क्रेडिट स्कोर खराब बोने के बाद भी लोगों को लोन दिला सकते हैं। लोगों को ठगी के जाल में फंसाकर उनसे कहा जाता था कि लोन/काम आदि के लिए प्रोसेसिंग फीस और टोकन मनी जमा करनी होगी।
क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से होता था ट्रांजैक्शन :
आरोपी यह रकम सीधे रुपये में लेने के बजाय क्रिप्टोकरेंसी के रूप में एक डिजिटल एप के जरिए मंगवाते थे। इसके बाद रकम को क्रिप्टोकरेंसी के रूप में चीन से अहमदाबाद और फिर अहमदाबाद से दिल्ली ट्रांसफर किया जाता था। दिल्ली पहुंचने के बाद आरोपी चाइनीज डिजिटल गेटवे की मदद से क्रिप्टोकरेंसी को नकदी में बदलवा लेते थे। 50 से 2000 हजार डॉलर तक ट्रांसफर कराए जाते थे। यानी भारतीय रुपये के हिसाब से 4500 हजार से 1.8 लाख रुपये की तक की ठगी प्रत्येक व्यक्ति से की जाती थी। आरोपी पिछले डेढ़ माह में 30 से अधिक लोगों से 10 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर चुके हैं। पुलिस की ओर से आरोपियों के बैंक खातों की भी जांच की जा रही है।