दूसरी छात्रा को क्लास मॉनिटर बनाए जाने से आया व्यवहार में बदलाव
नोएडा के नामी स्कूल में आठवीं कक्षा की छात्रा को क्लास मॉनिटर नहीं बनाया गया। उसकी जगह दूसरी छात्रा को शिक्षक ने चुन लिया। इससे नाखुश छात्रा ने खुद को ही दूसरों से कमतर मान लिया। इसकी वजह से वह गुमशुम रहने लगी। हमेशा शांत रहने वाली छात्रा अचानक से गुस्सैल व्यवहार करने लगी। कुछ समय बाद जब छात्रा का व्यवहार परिजनों को असामान्य लगा तो उसे मनोचिकित्सक के पास ले गए। काउंसलिंग के बाद उसका व्यवहार बेहतर हुआ। खुद को दूसरों से बेहतर और मशहूर दिखाने के चक्कर में स्कूली बच्चे अवसाद में जा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर कम लाइक्स आने का गम
नोएडा के सेक्टर-27 का एक छात्र अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर रील और वीडियो पोस्ट करता था। उसके पोस्ट पर दोस्तों की तुलना में काफी कम लाइक्स आ रहे थे। ऐसे में वह तनाव में रहने लगा। कई प्रयासों के बाद भी लाइक्स की संख्या नहीं बढ़ी। इस बीच उसका तनाव इतना बढ़ गया कि आत्महत्या तक का प्रयास उसने किया। तबियत काफी बिगड़ने के बाद अब उसकी काउंसलिंग और जरूरी ट्रीटमेंट चल रहा है।
दूसरी छात्रा को हेड गर्ल बनाने से हुई परेशानी
नोएडा के एक नामी स्कूल में एक छात्रा को हेड गर्ल बनाने की जगह दूसरी छात्रा को शिक्षक ने चुन लिया। इससे छात्रा परेशान रहने लगी। छात्रा की परेशानी देखकर उसके परिजन भी स्कूल में विवाद करने पहुंच गए। उनका कहना था कि उनकी बेटी को हेड गर्ल बनने का मौका मिलना चाहिए था। जिस लड़की को हेड गर्ल बनाया गया, उसके केवल 0.3 फीसदी मार्क्स ही कम थे। इस मामले में विवाद के अलावा छात्रा को भी तनाव बढ़ा हुआ था। ऐसे में उसको नींद नहीं आने की भी शिकायत बढ़ गई।
बातचीत से बच्चों को बना सकते हैं स्वस्थ
इस तरह के मामलों से निबट रहे मनोचिकित्सक डॉ. पुनीत गर्ग का कहना है कि स्कूली बच्चों में तनाव और अवसाद के मामलों में बातचीत जरूरी है। अधिकांश मामलों में बच्चे के अलावा शिक्षक और परिजनों की भी काउंसलिंग करनी होती है। कोई भी अपने बच्चे को कमतर नहीं देखना चाहता। कई परिजनों को लगता है कि वे मोटी फीस खर्च कर रहे हैं। ऐसे में उनके बच्चे को प्राथमिकता देते हुए स्कूल बेहतर बनाए। इससे हालात और बिगड़ जाएंगे। परिजनों को भी अपने बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि उन्हें बेहतर करने के लिए कठिन प्रयास भी करने जरूरी हैं। हर कोई विजेता नहीं हो सकता। यह भी समझना होगा।