अमेठी सिटी। तिलोई के मेढौना गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन प्रवाचक आचार्य शांतनु महाराज ने कहा कि सनातन धर्म ही भारत की आत्मा है। जो इस देश में रहना चाहता है, उसे इसकी परंपराओं और आस्था का सम्मान करना होगा। सनातन धर्म पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि ऐसा जीवन दर्शन है जो मानवता, करुणा और सेवा की राह दिखाता है।
प्रवाचक ने कहा कि दीपावली और धनतेरस जैसे त्योहार केवल रोशनी के पर्व नहीं, बल्कि समाज में समरसता और सहयोग का संदेश देने वाले अवसर हैं। उन्होंने सनातनी परिवारों से आग्रह किया कि वे हिंदू दुकानदारों से ही खरीदारी करें, ताकि खर्च किया गया धन समाज की भलाई में लगे और किसी अनुचित कार्य में उपयोग न हो। उन्होंने कहा कि छोटे व स्थानीय दुकानदारों से खरीदारी करना ही सच्ची सेवा है, क्योंकि इससे उन परिवारों में भी खुशियां पहुंचेंगी, जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं।
शांतनु महाराज ने कहा कि सनातनी क्रिकेट प्रीमियर लीग समाज में ऊर्जा और सेवा की भावना जगाने की दिशा में शुभ पहल है। साधु-संतों के सहयोग से आयोजित यह आयोजन धर्म और खेल के समन्वय का उदाहरण है। इस लीग से प्राप्त धनराशि बाढ़ पीड़ितों और जरूरतमंद परिवारों की सहायता में खर्च की जाएगी।
उन्होंने कहा कि अयोध्या का दीपोत्सव अब पूरी दुनिया में सनातन संस्कृति की पहचान बन चुका है। आज दुनिया के हर कोने में बसे हिंदू गर्व से कहते हैं कि वे उस भूमि से जुड़े हैं जहां भगवान श्रीराम ने जन्म लिया। भारत की संस्कृति प्रेम, करुणा, श्रद्धा और सेवा की भावना पर आधारित है। जो इस मूल संस्कृति का सम्मान करता है, वही इस देश की आत्मा को समझ सकता है।