लखनऊ। सहारा समूह ने भले ही देश की अन्य संपत्तियों के साथ गोमती नगर स्थित सहारा शहर की जमीन को बेचने की अनुमति सुप्रीम कोर्ट से मांगी है, मगर वह ये जमीन किसी को बेच नहीं पाएगा क्योंकि जमीन का मालिक नगर निगम है। नगर निगम 170 की ये जमीन सहारा समूह को आवासीय योजना विकसित करने के लिए 30 साल की लीज पर दी थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद नगर निगम ने लीज निरस्त करते हुए सहारा शहर की जमीन कब्जा भी ले लिया।
नगर आयुक्त गौरव कुमार ने स्पष्ट किया कि नगर निगम ने 1994 में आवासीय योजना विकसित करने के लिए सहारा इंडिया हाउसिंग लिमिटेड को शर्तों के तहत जमीन दी थी। इसमें आवासीय प्लाॅट व मकान बनाकर काॅलोनी विकसित की जानी थी। शर्तों के उल्लंघन पर नगर निगम ने 1997 में लाइसेंस डीड निरस्त करने का नोटिस भी जारी किया था। इसके बाद भी कंपनी ने आम लोगों के आवासीय योजना विकसित नहीं की। ऐसे में लीज का समय पूरा होने पर उसे निरस्त करते हुए नगर निगम ने जमीन पर कब्जा ले लिया है। मौके पर नगर निगम के बोर्ड भी लगे हैं। नगर निगम ने यह कार्रवाई न्यायालय का आदेश के बाद ही की है।
सेबी को नगर निगम ने दी थी जानकरी
साल 2013 में सेबी ने सहारा शहर की देश भर की संपत्तियों के साथ गोमती नगर में सहारा शहर को भी कुर्क करने का नोटिस जारी किया था। इस पर तत्कालीन नगर आयुक्त ने सेबी प्रमुख को पत्र लिखकर बताया था कि जमीन स्वामित्व नगर निगम के पास है। सहारा को जमीन सिर्फ आवासीय योजना विकसित करने के लिए लाइसेंस की शतोZं पर दी गई है। ऐसे में इसे सहारा की जमीन मानकर कुर्क नहीं किया जा सकता। इस पत्र के बाद नगर निगम को सेबी से राहत मिली थी।
फैक्ट फाइल
- 22 अक्तूबर 1994 को जमीन विकसित करने के लिए सहारा को लाइसेंस दिया गया।
- 1997 में नगर निगम ने शर्तों के उल्लंघन पर लाइसेंस निरस्त करने का नोटिस दिया।
- 31 अगस्त 2012 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत सेबी ने सहारा शहर की जमीन कुर्क करने की सूचना नगर निगम को दी।
- 8 मई 2013 को नगर आयुक्त ने सेबी अध्यक्ष को पत्र लिखकर बताया कि उक्त जमीन का मालिक नगर निगम है।
- 27 सितंबर 2025 को नगर निगम ने लीज निरस्त करने के बाद सहारा शहर की जमीन अपने कब्जे के बोर्ड लगाए।
जब जमीन का मालिक ही सहारा नहीं है, तो वह जमीन किसी और को कैसे बेच सकता है। जमीन तो लीज पर दी गई थी और वह भी समय पूरा होने के बाद निरस्त हो चुकी है।
- गौरव कुमार, नगर आयुक्त