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Noida News: ग्राहकों के खाते से 67 लाख रुपये का गबन

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मोदीनगर। निवाड़ी के कस्बा पतला स्थित पंजाब एंड सिंध बैंक शाखा के क्लर्क सोमिल तिवारी ने अज्ञात आरोपियों के साथ मिलकर ग्राहकों के खातों से 67 लाख रुपये का गबन कर दिया। आरोपी ने महिलाओं और किसानों के खातों को निशाना बनाया। जांच में सात खाताधारक सामने आए। अभी तीन दिन पूर्व एक किसान ओमकार ने खाते से साढ़े ग्यारह लाख रुपये का गबन होने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था। निवाड़ी पुलिस ने बैंक शाखा प्रबंधक की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की है।
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कस्बा पतला स्थित पंजाब एंड सिंध बैंक शाखा प्रबंधक हिमांशु गुप्ता की ओर से दर्ज कराई है। रिपोर्ट के अनुसार मूलरूप से जनपद कानपुर नगर स्थित कल्याणपुर पश्चिम निवासी सोमिल तिवारी बैंक में ग्राहक सेवा सहयोगी के पद पर तैनात हैं। सोमिल तिवारी की तैनाती वर्ष 2022 में हुई थी। सोमिल तिवारी ने अपने अज्ञात साथी अधिकारियों के साथ मिलकर लगभग 67 लाख रुपये का गबन कर दिया। सोमिल तिवारी ने अकिलामा खातून, विमला सिंह, राजबाला, मायादेवी, महेन्द्री, राजेन्द्र प्रसाद और रणवीरी ओमकार के खाते से लगभग 42 लाख रूपये का गबन किया। आरोपी ने इनके खातों में जमा रकम को आरटीजीएस आदि समेत कई माध्यम से जनपद बागपत की मेरठ रोड स्थित मुन्ना लाल एनक्लेव कॉलोनी निवासी तनुशिखा भारती के बैंक खाते में रकम ट्रांसफर की। जांच में सामने आया की आरोपी ने तनुशिखा के खाते में कुल 64 लाख रूपये जमा किए। इसके अलावा आरोपी ने आईडीबीआई की रतलात कोठी शाखा में प्रवेश मोदी के नाम से खाते में भी काफी रकम ट्रांसफर की। ग्राहकों को खातों से रकम साफ होने की जानकारी लगी तो उन्होंने शिकायत करनी शुरू की। देखते ही देखते सात ग्राहक सामने आ गए, जिनके खातों से 42 लाख रुपये से अधिक की रकम साफ हुई। बैंक प्रबंधक हिमांशु गुप्ता ने बताया कि क्षेत्रीय प्रबंधक नोएडा द्वारा आरोपी क्लर्क सोमिल तिवारी को निलंबित कर दिया गया है। एसीपी मोदीनगर का कहना है कि मामला गंभीर है। मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है।
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गबन में सोमिल तिवारी के साथ बैंक अधिकारियों के लिप्त होने की संभावना
पंजाब एंड सिंध बैंक की पतला शाखा में हुए गबन में सोमिल तिवारी के साथ बैंक अधिकारियों के भी लिप्त होने की आशंका है। बैंक प्रबंधक हिमांशु गुप्ता की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट में भी इसकी आशंका जताई गई है। नियमानुसार ज्यादा रकम के लेनदेन में बैंक के उच्चाधिकारियों की संस्तुति और स्वीकृति जरूरी होती है। इसलिए अकेले क्लर्क द्वारा गबन करना मुश्किल है। गबन में उसके साथ कोई न कोई अधिकारी भी संलिप्त रहा होगा।
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निशााने पर थे महिलाओं और किसानों के खाते, दस महीने तक किया गबन
जिन सात खातों में जमा रकम के गबन की पुष्टि हुई है। उनमें से पांच खातें केवल महिलाओं के हैं और एक खाता महिला का संयुक्त खाता है व एक खाता किसान के नाम पर है। इनमें अधिकांश खाते ऐसे हैं जिनमें चेक बुक जारी नहीं थी। आरोपी ने ऐसे खातों के नाम पर अल्पकालिक चेक जारी कर रकम गबन की। बैंक की जांच में पहला गबन जनवरी 2025 में आमने आया और अंतिम गबन अक्टूबर 2025 में किया। गबन की जानकारी लगने पर क्षेत्रीय प्रबंधक ने आरोपी क्लर्क सोमिल तिवारी को निलंबित कर दिया। आरोपी बेखौफ होकर दस महीने तक किसानों और महिलाओं के खातों में जमा रकम का गबन करता रहा। अगर खाता धारक शिकायत न करते तो शायद आरोपी और ज्यादा खाता धारकों को रकम साफ कर सकता था।

अमर उजाला ने बैंक में रकम गबन को दो दिन पूर्व किया था उजागर
कस्बा पतला निवासी किसान ओमकार के खाते जुलाई से अक्टूबर के बीच नौ बार में साढ़े ग्यारह लाख रुपये से अधिक का गबन हुआ। ओमकार ने मामले की शिकायत बैंक और पुलिस अधिकारियों से की। इसी बीच अमर उजाला को बैंक में बड़ी रकम के गबन की पुख्ता जानकारी लगी। अमर उजाला ने बैक से रकम गबन को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
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