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Chandrayaan 3: चंद्रयान-3 ही नहीं ISRO के इन मिशन में काम कर चुकी हैं रितु, जानें रॉकेट वूमन के बारे में सबकुछ

Wed, 23 Aug 2023 10:57 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा

सार

भारत की 'रॉकेट वूमन' के नाम से मशहूर लखनऊ की बेटी डॉ. रितु कारिधाल को इसरो ने चंद्रयान-3 की लैंडिंग की जिम्मेदारी सौंपी है। वरिष्ठ महिला वैज्ञानिक डॉ. रितु चंद्रयान-3 की मिशन डायरेक्टर हैं। अभियान के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पी. वीरा मुथुवेल हैं। इसके पहले डॉ. रितु मंगलयान की डिप्टी ऑपरेशन डायरेक्टर और चंद्रयान-2 में मिशन डायरेक्टर रह चुकी हैं। 
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Ritu Karidhal - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत का तीसरा चंद्र मिशन 'चंद्रयान-3' (Chandrayaan-3) बुधवार शाम चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) से युक्त लैंडर मॉड्यूल शाम छह बजकर चार मिनट पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ्ट लैंडिंग कर सकता है। 
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भारत ने 14 जुलाई को लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (एलवीएम3) रॉकेट के जरिए 600 करोड़ रुपये की लागत वाले अपने तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण किया था। इसके तहत चंद्रयान 41 दिन की अपनी यात्रा में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। यहां अभी तक कोई भी देश नहीं पहुंच पाए हैं।

भारत की 'रॉकेट वूमन' के नाम से मशहूर लखनऊ की बेटी डॉ. रितु कारिधाल को इसरो ने चंद्रयान-3 की लैंडिंग की जिम्मेदारी सौंपी है। वरिष्ठ महिला वैज्ञानिक डॉ. रितु चंद्रयान-3 की मिशन डायरेक्टर हैं। अभियान के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पी. वीरा मुथुवेल हैं। इसके पहले डॉ. रितु मंगलयान की डिप्टी ऑपरेशन डायरेक्टर और चंद्रयान-2 में मिशन डायरेक्टर रह चुकी हैं। 
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इस बार चंद्रयान-3 में ऑर्बिटर नहीं बल्कि एक प्रोपल्शन मॉड्यूल है, जो किसी संचार उपग्रह की तरह काम करेगा। आइए विस्तार से जानते हैं डॉ. रितु कारिधाल के इसरो में योगदान और उनके व्यक्तिगत जीवन के बारे में। 
 

मंगलयान और चंद्रयान-दो में भी रहा डॉ. रितु का योगदान 
इसरो से मिली जानकारी के मुताबिक, डॉ. रितु मंगलयान की डिप्टी ऑपरेशन डायरेक्टर और चंद्रयान-2 में मिशन डायरेक्टर रह चुकी हैं। इस बार चंद्रयान-3 में ऑर्बिटर नहीं बल्कि एक प्रोपल्शन मॉड्यूल है, जो किसी संचार उपग्रह की तरह काम करेगा।

लखनऊ में ही डॉ. रितु का हुआ पालन-पोषण
रितु कारिधाल का पालन-पोषण लखनऊ के ही मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ है। उन्होंने नवयुग गर्ल्स कॉलेज से इंटर करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। यहां उन्होंने फिजिक्स से ग्रेजुएशन और फिर पोस्ट ग्रेजुएशन किया। इसके बाद रितु ने GATE पास कर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेस (IISc) बेंगलुरु में दाखिला लिया।

यहां रितु ने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में डिग्री ली।  डॉ. करिधाल ने नवंबर 1997 से इंजीनियर के तौर पर इसरो में काम करना शुरू किया। इतना ही नहीं यूजी व पीजी के बाद रितु ने लखनऊ विश्वविद्यालय से ही फिजिक्स में पीएचडी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। उन्हें अपने ही विभाग में पढ़ाने का मौका भी मिला। लेकिन उन्हें पीएचडी करते हुए छह महीने ही हुए थे कि उन्होंने गेट (GATE) क्वालिफाई कर लिया। 

बचपन से थी चांद-सितारों में दिलचस्पी
डॉ. रितु कारिधाल का जन्म 1975 में लखनऊ के मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ। बचपन से उन्हें चांद-सितारों और आसमान में दिलचस्पी थी। इसरो और नासा से संबंधित समाचार पत्रों के लेख, जानकारी और तस्वीरें इकट्ठा करना उनका शौक था। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से भौतिकी में एससी और एमएससी की पढ़ाई की। 

माता-पिता के बाद रितु ने ही छोटे भाई-बहन का रखा ख्याल
रितु लखनऊ के राजाजीपुरम की रहने वाली हैं। माता-पिता का निधन हो चुका है। माता-पिता के बाद रितु ने ही अपने छोटे भाई-बहन का ख्याल रखा। रितु के दो बच्चे भी हैं जिनका वह अच्छी तरह ध्यान रखती हैं।
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मिशन चंद्रयान-2 की लॉचिंग के समय रितु के भाई रोहित ने कहा था कि हमें नाज है अपनी बहन पर। रितु निजी जीवन में जितनी पारंपरिक है, काम के मामले में उतनी ही प्रोफेशनल भी हैं। 
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