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Noida News: रोजाना हो रही बिजली कटौती से मशीनों के खराब होने का खतरा

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पंकज मिश्रा
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- उद्यमी बोले, नियमित बिजली व्यवस्था तक नहीं, हर माह हजारों रुपये का डीजल खर्च करने की मजबूरी
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। बिजली ट्रिपिंग की समस्या उद्यमियों पर भारी पड़ रही है। दिन में चार से पांच बार बिजली कटौती होने से काम में उद्यमी परेशान हैं। उत्पादन में रुकावट नहीं आए और मशीनें खराब होने से बचाने के लिए उद्यमी जरनेटर और स्टेबलाइजर और खरीदने को मजबूर हैं। यही नहीं हर माह उन्हें डीजल पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ने पड़ रहे हैं।


बुधवार को सेक्टर-63 डी ब्लॉक में आयोजित अमर उजाला संवाद में उद्यमियों ने अपनी समस्याएं बताईं। हर्ष गोयल ने बताया कि सेक्टर-63, 69 जैसे औद्योगिक क्षेत्र में नो पावर कट जोन होने के बावजूद दिन में चार से पांच बार बिजली कटौती की जा रही है। बार-बार कटौती से मशीनों के खराब होने का खतरा बना रहता है। इससे बचाव के लिए उन्होंने स्टेबलाइजर और चार जनरेटर खरीदे हैं। जिससे उत्पादन में कोई रुकावट न आए और आठ घंटे की शिफ्ट में नियमित काम हो सके। जनरेटर के लिए डीजल खरीदने पर ही हर माह हजारों खर्च करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर उत्पादन के खर्च से जुड़ता है। जहां रोजाना पांच लाख रुपये की लागत से पांच हजार उत्पाद तैयार होते थे वहां अब कहीं ज्यादा खर्च पर उतने ही उत्पाद तैयार हो रहे हैं। इस नुकसान का खामियाजा तब उठाना पड़ता है जब उद्यमियों को अपने उत्पाद पुराने रेट पर ही वेंडर को उत्पाद बेचने पड़ते हैं।
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वहीं ऐश्वर्या सिंह के मुताबिक हल्की बारिश होते ही सेक्टर-63 का पूरा इलाका पानी में डूब जाता है। ड्रेनेज सिस्टम बेहतर नहीं हो सका। उद्यमी अंकित चौहान ने बताया डी ब्लॉक में बनी पार्किंग में प्राधिकरण के कर्मचारी पूरे कूड़े को डंप कर देते हैं, जिससे दुर्गंध आती है। उन्होंने पार्किंग में काम करने वाले कर्मचारियों की पहचान के लिए यूनीफॉर्म और नाम का स्टीकर लगाने की बात कही।
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डी-99 के सामने के पार्क में पार्किंग तो हैं लेकिन प्राधिकरण के कर्मी कूड़ा डंप कर देते हैं, जिससे दुर्गंध आती है। - सत्यम पांडेय
ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाया जाना चाहिए, बारिश के वक्त कंपनी से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। -आरुषि आर्या
बिजली की आपूर्ति में सुधार की आवश्यकता है। रोजाना चार से पांच बार बिजली कटने से उत्पादन प्रभावित होता है।- हर्ष गोयल
व्यस्त समय में कोई चाहे तब भी समय पर अपने घर नहीं पहुंच सकता, क्योंकि सेक्टर में हर जगह अतिक्रमण है। - गौरव नागपाल
आईजीएल, पॉलिस्टर और केमिकल के दाम आसमान छू रहे हैं, इसे काबू करने के लिए सरकार प्रयास करे। -शशांक द्विवेदी
चीनी, मैदा की कीमत समेत पैकेजिंग की लागत काफी बढ़ चुकी है, इसका उल्टा भार हमें खुद संभालना पड़ता है। -पंकज मिश्रा

पंकज मिश्रा

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