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Noida News: दस्तावेज बदलकर करा ली डूब क्षेत्र की रजिस्ट्री, एफआईआर दर्ज

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अमर उजाला असर -
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दस्तावेज बदलकर करा ली डूब क्षेत्र की रजिस्ट्री, एफआईआर दर्ज
- रजिस्ट्री का एक पेज बदलकर डूब क्षेत्र के खसरा नंबर से कराया दाखिल खारिज

- छिजारसी गांव का मामला, एसडीएम दादरी के पेशकार ने दादरी कोतवाली में दर्ज कराया मुकदमा
- आबादी के खसरा नंबर से कराई थी रजिस्ट्री, बाद में डूब क्षेत्र के खसरा नंबर से कराया दाखिल खारिज
-5 जून को अमर उजाला ने खबर प्रकाशित कर किया था डूब क्षेत्र में रजिस्ट्री होने का खुलासा
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। फर्जी दस्तावेज के आधार पर छिजारसी गांव में डूब क्षेत्र के प्लॉट का दाखिल-खारिज कराने पर जिला प्रशासन ने एफआईआर दर्ज कराया है। आरोपी ने छिजारसी गांव के डूब क्षेत्र में प्लॉट खरीदा था। जिसकी रजिस्ट्री आबादी के खसरा नंबर से कराई गई थी। प्लॉट के दाखिल-खारिज कराने के लिए रजिस्ट्री के दस्तावेज बदलकर डूब क्षेत्र के खसरा नंबर पर नाम दर्ज करा लिया। इसके लिए आरोपी ने रजिस्ट्री के फर्जी दस्तावेज का प्रयोग किया था। मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

गाजियाबाद के वीवीआईपी राजनगर एक्सटेंशन निवासी राकेश कुमार ने छिजारसी गांव में 25 अप्रैल 2022 को प्लॉट खरीदा था। उप निबंधक प्रथम नोएडा कार्यालय में प्लॉट की रजिस्ट्री कराई। रजिस्ट्री कराने के दौरान प्लॉट को छिजारसी गांव के आबादी के खसरा नंबर 217 में दर्शाया गया। रजिस्ट्री कराने के बाद राकेश कुमार ने तहसीलदार दादरी न्यायालय में दाखिल-खारिज कराने का प्रार्थना पत्र दिया। इसमें सभी दस्तावेज पेश किए थे। बैनामा की कॉपी दस्तावेज के साथ देते समय हेराफेरी करते बैनामे की कॉपी में पेज-6 को पूरी तरह बदल दिया गया।
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इसमें आबादी के खसरा नंबर 217 की जगह डूब क्षेत्र के 538 दर्ज कर किया गया था। दस्तावेज के आधार पर न्यायालय ने दाखिल खारिज कर प्लॉट को राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर दिया। मामले की शिकायत के बाद दाखिल-खारिज और विभाग में जमा बैनामे की कॉपी की जांच में गड़बड़ी का खुलासा हुआ। एसडीएम कोर्ट के पेशकार शशि भूषण तिवारी ने राकेश कुमार के खिलाफ दादरी कोतवाली में तहरीर दी थी। पुलिस ने दादरी कोतवाली पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।

करेक्शन डीड कराना चाहता था आरोपी

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि रजिस्ट्री कराने के बाद आरोपी तितम्मा (करेक्शन डीड) की मदद से खसरा नंबर बदलना चाहता था। अधिकारियों के इन्कार करने पर उसने हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने तितम्मा करने का आदेश दिया। उसके बाद भी तितम्मा नहीं हुआ तो आरोपी ने अवमानना का हवाला दिया था।
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अमर उजाला की खबर के बाद हुई जांच में हुआ खुलासा

अमर उजाला ने 5 जून को ‘महज 200 रुपये के खर्च में हो रही है डूब क्षेत्र की रजिस्ट्री’ शीषर्क के साथ खबर प्रकाशित कर डूब क्षेत्र में रजिस्ट्री का खुलासा किया था। जिस पर प्रशासन ने जांच शुरू की। जांच में करेक्शन डीड का रिकॉर्ड देखा गया। छिजारसी गांव में करेक्शन डीड नहीं करने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के मामले काे संदिग्ध मानकर जांच की गई। जिसके बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। अधिकारियों ने तहसीलदार न्यायालय में दाखिल खारिज के दस्तावेज और उपनिबंधक प्रथम कार्यालय से रजिस्ट्री की सत्यापित छायाप्रति का मिलान किया। मिलान में रजिस्ट्री का पेज-6 बदला हुआ मिला। आरोपी ने न्यायालय में रजिस्ट्री जमा करने से पहले पेज-6 को बदल दिया था।
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