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Noida News: नजफगढ़ के 18 गांवों में मनाया गया रक्षाबंधन

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- वर्षों से रक्षाबंधन के 20 दिन बाद निभाई जाती है यह अनोखी परंपरा
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी के नजफगढ़ इलाके के सुरहेड़ा खाप के 18 गांवों में शुक्रवार को अनोखी परंपरा के तहत रक्षाबंधन का पर्व धूमधाम से मनाया गया। यहां आफरिया गोत्र के यादव समुदाय में सदियों से चली आ रही रस्म के अनुसार राखी का त्योहार भादो माह में अमावस्या के बाद आने वाली छठ को मनाया जाता है, यानी रक्षाबंधन से पूरे 20 दिन बाद राखी बांधी जाती है।
गांवों के बुजुर्गों के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत एक ऐतिहासिक घटना से हुई थी। कहा जाता है कि प्राचीन काल में यादव का मुख्य व्यवसाय पशुपालन था और गाय को सबसे बड़ा धन व पूजनीय माना जाता था। रक्षाबंधन से एक दिन पहले उनकी गायें चुवी कर ली गई। गायों की तलाश में युवक घर से निकल पड़े और 20 दिन वापस लौटे। इस कारण रक्षाबंधन के दिन बहनों को भाइयों की कलाई पर राखी बांधने का अवसर नहीं मिल सका। तभी से इस गोत्र में रक्षाबंधन भादो माह में इस दिन मनाने की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी उतनी ही आस्था और उल्लास के साथ निभाई जाती है।
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गत वर्षों की भांति शुक्रवार को इन गांवों की लड़कियों ने परंपरागत वेशभूषा में सजे थाल के साथ अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उनके दीर्घायु होने की कामना की। भाइयों ने बहनों को उपहार और आशीर्वाद दिया। इस मौके पर गांवों में मेले जैसा माहौल रहा और पारिवारिक मिलन का उत्साह देखने को मिला। इस परंपरा से सुरहेड़ा, जाफरपुर, खड़खड़ी नाहर, खड़खड़ी जटमल, खेड़ा डाबर, खैरा, हसनपुर, घूमनहेड़ा, झुलझुली और दौलतपुर सहित 18 गांव शामिल हैं।
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