रेलवे अपने दैनिक यात्रियों को मेट्रो जैसे सफर का अहसास कराने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए वंदेभारत ट्रेन की तर्ज पर वातानुकूलित वंदे मेट्रो ट्रेन चलाई जाएंगी। इससे 200 किलोमीटर के दायरे में आने वाले छोटे शहर दिल्ली, मुंबई सरीखे दस लाख से ज्यादा आबादी वाले बड़े शहरों से जुड़ जाएंगे। छोटे रूट पर भी रफ्तार 110-130 किलोमीटर प्रतिघंटे होगी। अगले 10 दिनों में इसका ट्रायल शुरू होगा। जुलाई तक इसे ट्रैक पर भी उतार दिया जाएगा।
रेल मंत्रालय के मुताबिक, वंदे मेट्रो ट्रेन देशभर के 124 शहर को जोड़ेगी। इसके एक कोच में 280 यात्री सफर कर सकेंगे। इसमें से 100 लोगों के बैठने के लिए सीटें होंगी, जबकि 180 यात्री मेट्रो की तरह कोच में खड़े रहेंगे। इसे स्मोक डिटेक्शन सिस्टम और कवच सिस्टम से भी इस ट्रेन को लैस किया गया है। जरूरत पड़ने पर यात्री टॉक बैक सिस्टम से लोको पायलट से भी बात कर सकेगा। योजना के केंद्र में 10 लाख आबादी वाले बड़े शहर हैं। इनके 200 किमी के दायरे में दैनिक यात्रियों की आवाजाही बेहतर करने की रेलवे की योजना है। वहीं, यूरोप में जिस तरह की ट्रेन होती है, उसी डिजाइन की वंदे मेट्रो होगी। दिल्ली मेट्रो की तरह साइड सीट बेंचनुमा, लेकिन आरामदायक होगी। पहले चरण में यह ट्रेन 12 कोच वाली होगी। 4, 8, 13, 16 कोच वाली ट्रेनें छोटे शहरों को कनेक्ट करेंगी। जल्द ही देशभर में वंदे मेट्रो दौड़ने लगेंगी। राजकोट-अहमदाबाद, चेन्नई-तिरुपति जैसे शहरों को एक-दूसरे से लिंक करने के साथ ही यह ट्रेनें हर राज्य की राजधानी से जोड़ेंगी।
अगस्त से वंदेभारत स्लीपर भी चलेगी
वंदे मेट्रो की तरह वंदेभारत स्लीपर कोच वाली ट्रेन भी जल्द ही पटरी पर उतरेगी। लंबी दूरी की यह ट्रेन अगले तीन महीने में चलाने की तैयारी है। यह ट्रेनें दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-कोलकाता, दिल्ली-चेन्नई, दिल्ली-विशाखापत्तनम समेत अन्य रूट पर चलेंगी। आधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रेनें आरामदायक यात्रा कराने में मददगार साबित होंगी। इसी तरह रेलवे वंदेभारत कुर्सीयान वाली ट्रेनों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है।
जल्द ही 50 अमृत भारत ट्रेन चलेंगी
रेल मंत्रालय के अनुसार, स्लीपर श्रेणी वाली अमृत भारत ट्रेन अब नये कलेवर में दिखेगी। इसे और अधिक गति देने के लिए 6000 हॉर्स पॉवर वाले दो इंजन को जोड़कर चलाया जाएगा। जल्द ही 50 और इस तरह की ट्रेनें ट्रैक पर उतरेंगी। साथ ही, 400 अमृत भारत ट्रेन निर्माण की स्वीकृति दी गई है। लंबी दूरी वाली यह ट्रेनें ज्यादा ट्रैफिक वाले रूट पर भी अपनी गति से चलेंगी। ट्रेनें 22 कोच वाली होंगी जिनमें 11 स्लीपर और 11 अनारक्षित कोच होंगे। रेलवे ने पैसेंजर ट्रेन के लिए भी इंजन के मॉडल को आधुनिक करने के साथ ही नया रूप दिया है। 1980 से अभी तक निर्मित हो रहे टी-5 मॉडल को बदलकर जीटीबी इंजन तैयार किया गया है। बुलेट व वंदेभारत ट्रेन की शेप इस नए इंजन को दी गई है। चितरंजन लोकोमोटिव में इसे तैयार किया जा रहा है।
दिल्ली-एनसीआर के लिए बेहद उपयोगी रहेगी वंदे मेट्रो
वंदे मेट्रो जुलाई में ट्रैक पर आने से सबसे बड़ा फायदा दिल्ली-एनसीआर के शहरों को होगा। 200 किमी के दायरे में आने वाले सभी शहरों के दैनिक यात्री वातानुकूलित कोच में आसानी से दिल्ली पहुंच सकेंगे। उन्हें पहले से टिकट भी बुक नहीं करवाना पड़ेगा। मेट्रो की तरह काउंटर पर टिकट लेकर वंदे मेट्रो में सफर किया जा सकेगा। माना जा रहा है कि वंदे मेट्रो के कारण लोग निजी वाहन छोड़ देंगे। इससे सड़क पर वाहनों की संख्या कम होगी और प्रदूषण भी कम होगा। हालांकि, रेलवे ने अभी इसके किराये की घोषणा नहीं की है।
इन ट्रैक के यात्रियों को लाभ
दिल्ली-गुरुग्राम
दिल्ली-मेरठ
दिल्ली-रेवाड़ी
दिल्ली-फरीदाबाद-पलवल-मथुरा
दिल्ली-सोनीपत, पानीपत
दिल्ली-रोहतक