नई दिल्ली। काउंसिल ऑन एनर्जी, एन्वायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) ने दिल्ली की वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (एक्यूईडब्ल्यूएस) की सटीकता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में शोधकर्ताओं का कहना है कि पुराने उत्सर्जन डेटा के कारण यह प्रणाली पीएम-2.5 के स्तर को 30-35 फीसदी तक कम आंक रही है। उदाहरण के तौर पर, यदि वास्तविक पीएम 2.5 स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है तो सिस्टम इसे केवल 65 माइक्रोग्राम दर्शाता है। सीईईडब्ल्यू के शोधकर्ता मोहम्मद रफीउद्दीन ने बताया कि दिल्ली के लिए उत्सर्जन डेटा 2021 से अपडेट नहीं हुआ है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 2016 से पुराना है। उन्होंने अमेरिका और चीन की तर्ज पर हर दो-तीन साल में उत्सर्जन सूची को अपडेट करने की जरूरत पर जोर दिया। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लिए तत्काल एक आधुनिक उत्सर्जन डेटाबेस तैयार किया जाए। यह प्रणाली न केवल भविष्य के प्रदूषण स्तर की भविष्यवाणी करेगी, बल्कि बीते वर्षों की वायु गुणवत्ता का सटीक विश्लेषण भी प्रदान करेगी। संवाद