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Noida News: आधा काम पूरा होने के बाद आई स्टील के गुणवत्ता की याद, होगी जांच

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नोएडा। सेक्टर 51 स्काईवाक । फोटो अमर उजाला
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- स्काईवॉक के निर्माण सामग्री की तकनीकी जांच में सामने आई खामी, एजेंसी से मांगा जवाब, आईआईटी जैसी संस्था करेगी जांच
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2023 में शुरू हुआ था निर्माणकार्य
10 बार पार हो चुकी काम पूरा करने की समयसीमा
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर 51-52 मेट्रो स्टेशन के बीच बन रहे स्काईवॉक और नाले का निर्माण का काम आधे से ज्यादा पूरा होने के बाद प्राधिकरण को गुणवत्ता जांच की याद आई है। बृहस्पतिवार को हुई तकनीकी जांच में निर्माण में उपयोग हो रही स्टील मानक के अनुसार नहीं मिलने पर आईआईटी जैसी संस्था से जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही निर्माण एजेंसी से भी जवाब मांगा गया है।
वर्ष 2023 में स्काईवॉक का निर्माण शुरू हुआ था। निर्माण के दौरान प्राधिकरण ने कुछ ही महीनों में स्काईवॉक का काम पूरा करने का हवाला भी दिया था। निर्माण कार्य पूरा करने की 10 डेडलाइन बीत चुकी हैं। 15 अगस्त को 11वीं बार तय समयसीमा भी गुजर जाएगी। इस बीच प्राधिकरण के जीएम एसपी सिंह बृहस्पतिवार को वर्क सर्कल-3 का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने निर्माणाधीन स्काईवॉक और नाले के निर्माण स्थल का भी निरीक्षण किया। तकनीकी टीम ने जांच में निर्माण सामग्री गुणवत्ता मानक के अनुसार नहीं मिली। इसपर तत्काल भुगतान रोकने के संग जांच के निर्देश दिए गए। साथ ही तीन दिनों के भीतर प्रबंधक से जवाब भी मांगा गया। लापरवाही जताते हुए मामले की आईआईटी जैसी विशिष्ट संस्थाओं से स्टील की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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33 करोेड़ की लागत से किया जा रहा है निर्माण
स्काईवॉक के निर्माण में 33 करोड़ रुपये की लागत आएगी। सेक्टर-51 की एक्वा लाइन और 52 की ब्लू लाइन के बीच इसे बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य डीएमआरसी को एनएमआरसी से जोड़ना है। पहले इसकी लंबाई लगभग 420 मीटर थी लेकिन डिजाइन में बदलाव के बाद इसकी लंबाई 520 मीटर हो गई है। निर्माण के दौरान मेट्रो का पोल भी बाधा बना था। जिसके बाद इसका डिजाइन बदला गया था।
पांच माह में निर्माण कार्य पूरा करने का किया था दावा
वर्ष 2023 में जब स्काईवॉक का निर्माण शुरू किया गया था तो पांच महीने के भीतर निर्माण पूरा करने का दावा भी किया गया था। इसके बाद एजेंसी की ओर से लगातार देरी की जाती रही। इस वजह से यात्रियों को इंटरचेंज के लिए एक स्टेशन से उतरकर दूसरी स्टेशन तक जाने के लिए बाहर बने फुटपाथ से होकर गुजरना पड़ रहा है। अब भी स्थिति ऐसी ही है। इससे यात्रियों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ होती है।
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निरीक्षण के दौरान गुणवत्ता मानकों के अनुसार नहीं मिली। जिसकी जांच के लिए निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही तीन दिनों के भीतर जवाब भी मांगा गया है। - एसपी सिंह, जीएम नोएडा प्राधिकरण
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