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नाम सिमरन से होती है आत्मा की शुद्धि : स्वामी दिनेशानंद

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सिरसा। अनाज मंडी में कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुति देती हुई कलाकार। संवाद
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सिरसा। अखिल भारतीय धर्म सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी दिनेशानंद महाराज ने बुधवार को श्री श्याम बगीची धाम में श्रीमद्भागवत कथा का पाठ किया। उन्होंने कथा का छठे दिन पाठ करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और राधा का मिलन परमात्मा का आत्मा से मिलन है। उन्होंने कहा कि नाम सिमरन से आत्मा की शुद्धि होती है।
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आत्मा का मन और इंद्रियों पर अनुशासन ही मनुष्य को महान बनाता है। परमात्मा श्री कृष्ण है और आत्मा राधा है, दोनों के मिलन को आत्मा से परमात्मा का मिलन बताया गया है। महामंडलेश्वर परमहंस ने कहा कि भागवत में व्यक्ति के सर्वागींण विकास के चार सूत्र दिए गए हैं। इनमें संयम, श्रेष्ठ कर्म, नाम जप और यज्ञ है।
वेदानुकूल शुभ कर्म, आचरण, धन, यश, मन, सुख-सम्मान का दाता है, जबकि पाप निकृष्ट कर्म मानव को पतन की और ले जाता है। संयम का अर्थ-शरीर, इंद्रियों और मन पर अनुशासन है। इंद्रियों और मन का स्वभाव है-विषयभोगों, विलास और निकृष्ट कर्मों का आचरण। स्वामी दिनेशानंद ने कहा कि जैसे पानी का स्वभाव नीचे की और बहना है, वैसे ही इंद्रियों का स्वभाव भी भोग और वासना की और जाना है।
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इसके कारण शारीरिक, मानसिक, बौधिक व आत्मिक शक्तियों का हस होता है। उन्होंने कहा कि मानव की मानवता पर दानवता हावी होती जा रही है। मनुष्य देव न रहकर नीचे गिरकर पशु स्तर का होता जा रहा है। ऐसे पतित मानव के लोक और परलोक दोनों बिगड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि मानव को अपनी इन भटकती हुई इंद्रियों को काबू में करना होगा। इन पर कड़ा संयम धारण करना होगा।
स्वामी ने कहा कि मानव के सामने लक्ष्य परमात्मा को आत्मा के साथ जोड़ना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वैदिक मार्ग पर चलना होगा। स्वामी ने श्रद्धालुओं से कहा कि नाम का सिमरन, नाम का जाप मानव के अंतकरण में जमा मैल को झाडू लगाकर साफ करने का काम करता है। कथा के बाद श्रीमद्भागवत की आरती की गई और श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।
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