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7 दिन पहले गेहूं की खरीद बंद, किसान परेशान

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पुन्हाना/नूंह। प्रदेश सरकार द्वारा गेहूं की सरकारी खरीद निर्धारित समय से पहले बंद किए जाने से जिले के सैकड़ों किसान अपनी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पाए हैं। इस कारण किसान काफी परेशान हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार एक तरफ तो किसानों की फसल का एक-एक दाना खरीदने का दावा करती है, लेकिन दूसरी तरफ गेहूं की सरकारी खरीद 17 दिन पहले ही बंद कर दी। इस कारण काफी किसान सरकारी रेट पर गेहूं बेचने से वंचित रह गए हैं।
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रणवीर दुबालू, ज्ञानचंद कुर्थला, तेजराम छपेड़ा, मानसिंह गांगोली, हरिओम आलदोका, अमरजीत मिंडकोला, समसुद्दीन रेवासन, उदय खलीलपुर, मनवीर, सुंदर हसनपुर, जीतन बझेड़ा, किशन इंडरी, देवीसिंह बझेड़ा, राजकुमार हसनपुर सोहना, पिंकी खलीलपुर, श्रीराम हसनपुर, सुरेंद्र आलदोका, मुबीन दिहना आदि दर्जनों किसानों का कहना है कि सरकार को इस महामारी और रमजान के माह में खरीद और लंबी चलानी चाहिए थी, लेकिन 15 मई के बजाय 29 अप्रैल से खरीद बंद होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आरोप है कि अब वह फसल मंडी में लेकर जाते हैं तो आढ़ती सरकारी दर पर न लेकर काफी कम दामों में खरीद रहे हैं। इससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। किसानों की मांग है कि गेहूं की खरीद कम से कम एक सप्ताह और की जाए।
वहीं, नूंह अनाज मंडी एसोसिएशन के उपाध्यक्ष कंवर लक्ष्मण सिंह, उपाध्यक्ष सुंदर नागपाल, सचिव सूरज खुराना, आढ़ती शेर सिंह डागर, कमल गोयल पार्षद, सतपाल सिंगला मेवली, गौरव गुप्ता, अंशुल गुप्ता, अंकुर कथूरिया, तरुण कुमार, हाजी जुबेर आदि आढ़तियों का कहना है कि खरीद बंद होने से काफी किसान गेहूं बेचने से रह गए हैं। एसोसिएशन की मांग है कि सरकार खरीद को फिर से शुरू करे। वैसे भी सरकार ने गेहूं की खरीद की आखिरी तिथि 15 मई तक निर्धारित की थी, लेकिन 29 अप्रैल से ही बंद कर दी। इस बारे में एसोसिएशन ने उपायुक्त को भी अवगत कराया है, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस कारण किसान मायूस हैं। किसान एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला से मांग की है कि गेहूं की खरीद को दोबारा शुरू किया जाए।
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