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तावडू। उपमंडल के गांव गोगजाका के बाल्मीकि मोहल्ले में जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगाया गया बोरवेल पिछले 1 साल से खराब है। ग्रामीणों द्वारा कई बार इस समस्या के संबंध में ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों व जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया है। लेकिन, समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। अभी तक बोरवेल को सुचारु रुप से चालू नहीं किया गया है। ग्रामीण पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। मजबूरन पेयजल संकट को दूर करने व घरेलू काम के लिए ज्यादातर महिलाएं दूर-दराज से सिर पर पानी ढोने को मजबूर हैं।
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गोगजाका निवासी काला, शारदा, ललिता, बबीता, वीरवती, कैलाश, रोहतास, सुंदर, आशा, रतिराम, रामपत आदि ने बताया कि उनके मोहल्ले में पेयजल समस्या का हल करने के उद्देश्य से जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से करीब दो-तीन साल पहले बोरवेल में लगाया गया था। कुछ दिन तो ग्रामीणों को उसका लाभ मिला। कुछ समय बाद से ही बोरवेल में लगी मोटर खराब हो गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले लगभग 1 साल से मोटर खराब है। जिसको लेकर ग्राम सरपंच व अन्य प्रतिनिधियों को अवगत कराया है। इसके अलावा जन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को भी बताया गया।
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उन्होंने बताया कि गत 7 जून को गांव में पानी की समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके बाद जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा बोरवेल से मोटर को ठीक कराने के लिए निकाला गया था लेकिन अभी तक मोटर को दोबारा नहीं लगाया गया है। फ़िलहाल मोहल्ले में पानी की सुविधा नहीं मिलने पर परिवार की महिलाएं व अन्य सदस्य दूरदराज से सिर पर पानी लेकर आते हैं।
उन्होंने प्रशासन व जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि जल्द से जल्द उनके मोहल्ले के बोरवेल को ठीक किया जाए ताकि पेयजल आपूर्ति हो सके।
जलापूर्ति होगी बहाल
जन स्वास्थ्य विभाग के जेई परवेज ने 1 साल से बोरवेल खराब होने के आरोपों को नकार दिया। उन्होंने कहा कि मोटर जरूर खराब है उसे जल्द ही ठीक कराकर बोरवेल में डालकर गांव व मोहल्ले में जलापूर्ति बहाल कर दी जाएगी।
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फोटो ऱ् सर पर पानी ढोने को मजबूर गांव की महिलाएं
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