-23 सितंबर को एनजीटी में हुई थी सुनवाई, प्राधिकरण ने रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए मांगा चार सप्ताह का समय
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। बागवानी में नोएडा प्राधिकरण की ओर से पेयजल का इस्तेमाल करने के मामले पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में सुनवाई जारी है। इस संबंध में 23 सितंबर को सुनवाई हुई तो नोएडा प्राधिकरण ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा है। इससे पहले 15 मई को सुनवाई हुई थी और अगली तारीख 23 सितंबर थी, लेकिन इन चार महीने में भी नोेएडा प्राधिकरण अपनी रिपोर्ट तैयार नहीं कर पाया।
बता दें कि पूर्व में सुनवाई के दौरान नोएडा प्राधिकरण ने एक जवाब दायर किया था जिसमें कहा गया था कि वह विभिन्न एसटीपी से 260 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलटी) उपचारित पानी पैदा कर रहा है। इसमें से 192 एमएलडी का उपयोग नहीं हो रहा है और इसे नालियों में बहा दिया जा रहा है। ऐसे में बताया गया था कि एसटीपी का उपचारित पानी का लगभग 20 प्रतिशत वर्तमान में उपयोग किया जा रहा है अन्य पानी को बहा दिया जाता है। बता दें कि फरवरी में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 100 फीसदी एसटीपी का पानी उपयोग करने का प्लान मांगा था। मई में हुई सुनवाई के दौरान नोएडा प्राधिकरण ने जो रिपोर्ट सौंपी थी इसमें 100 फीसदी एसटीपी उपचारित पानी का उपयोग नहीं हो पा रहा था। सितंबर की सुनवाई में आगे की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी लेकिन नोएडा प्राधिकरण ने चार सप्ताह का समय मांग लिया है। ऐसे में अगली सुनवाई 12 दिसंबर को होगी।
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कारों की धुलाई और फ्लश में किया जाए इस्तेमाल
सुनवाई के दौरान पर्यावरणविद अमित गुप्ता ने भी अपने सुझाव रखे। कहा कि एसटीपी का उपचारित पानी कारों की धुलाई, पब्लिक टॉयलेट के फ्लश में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। जबकि वहां पर पेयजल का इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ ही कंस्ट्रक्शन और बागवानी के लिए 100 फीसदी एसटीपी के पानी का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। जिन स्कूल, अस्पताल और मॉल में अपने एसटीपी नहीं हैं वहां के लिए एसटीपी उपचारित पानी देना चाहिए।
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वान्या दीक्षित