नोएडा। 25 करोड़ की चोरी के मामले में सामान के मालिक को तलाशने में आखिर पुलिस कामयाब हो गई है। पुलिस ने सनी से जो लाल सूटकेस बरामद किया है। उसमें मिले दस्तावेज के आधार पर पुलिस ने यह मान लिया है कि जिस फ्लैट से चोरी हुई थी वह और उसका सामान दोनों का पांडेय परिवार से सीधा संबंध है। सूटकेस में अंसल मेगापोलिस में 450- 450 वर्ग मीटर के दो प्लॉट के दस्तावेज मिले हैं जो राममणि पांडेय की पत्नी संजू और बेटे किसलय के नाम हैं। खरीदने के दौरान इनकी कीमत करीब 88-88 लाख रुपये दस्तावेज में दर्ज है। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया पिता-पुत्र लगातार इस फ्लैट और उसमें रखे सामान से इनकार कर रहे थे, लेकिन अब साक्ष्य मिल गए हैं और जल्द ही उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। इसके लिए लीगल टीम काम कर रही है।
एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि सूटकेस ने पुलिस की बहुत बड़ी परेशानी को हल कर दिया है। अभी तक पुलिस प्रयास कर रही थी कि कोई साक्ष्य मिल जाए। सनी से मिले सूटकेस में पांडेय परिवार के न सिर्फ दस्तावेज बल्कि, शादी की सीडी, जन्म कुंडली और कुछ चेकबुक व एटीएम कार्ड के अलावा पहचान पत्र मिले हैं। इनमें 18 कंपनियों से संबंधित दस्तावेज भी मिले हैं।किसलय और संजू के नाम से 88-88 लाख रुपये के दो प्लॉट ग्रेनो के अंसल मेगापोलिस में लिए गए थे। योग गुरु कृष्ण मुरारी से पूछताछ के बाद जो साक्ष्य मिले थे और जो बातें उसने बताई थीं, दस्तावेज मिलने के बाद काफी बातें सही साबित हुई हैं। कई चेक बुक मिली हैं। इनमें कुछ चेक भरे हुए थे। दो लाख का चेक राममणि के नाम से मिला हैं। संजू का आधार कार्ड और कई गाड़ियों की आरसी भी बरामद हुई है। इसके अलावा किसलय व राममणि आदि के शैक्षिक प्रमाणपत्र भी बरामद हुए हैं।
सूटकेस के दस्तावेज से 20 लाख कमाना चाहता था सनी
चोरी के माल से करीब 20 लाख रुपये कम मिले थे। बंटवारे के बाद सभी आरोपी लाल रंग के सूटकेस को सनी के पास ही यह कहकर छोड़ गए थे कि वह इसे जला दे या फिर नहर में ठिकाने लगा दे, लेकिन इस सूटकेस में मिले दस्तावेज, चेक और एटीएम कार्ड आदि ने सनी का लालच बढ़ा दिया। उसने सोचा कि चेक व एटीएम आदि से वह अपने हिस्से की रकम को पूरा कर सकता है, इसलिए सूटकेस के दस्तावेज को जलाने का इरादा टाल दिया। सनी की मंशा इन दस्तावेज से पांडेय परिवार को ही ब्लैकमेल करने की थी। इन दस्तावेज को वापस करके वह उनसे बीस लाख रुपये ऐंठना चाहता था।
सीधे साधे युवक की पैसे मिलने के बाद बदली लाइफ स्टाइल
गांव में सीधे साधे युवक के रूप में सनी की छवि थी। वह ग्रेटर नोएडा की एक कंपनी में कार चालक था। एकाएक चोरी की घटना के बाद उसका लाइफ स्टाल बदल गया था। रिश्तेदारों पर भी पैसा खर्च करना शुरू कर दिया था। वह खुद का प्रॉपर्टी डीलिंग का काम बताने लगा था। अधिकतर समय नोएडा-ग्रेटर नोएडा व बुलंदशहर में ही बिता रहा था। गांव के लोगों से अक्सर प्रॉपर्टी डीलिंग की बात कहकर अपनी चोरी की घटना को छिपाता था।
मीडिया के माध्यम से कर चुके हैं कई सरकारी विभाग का स्टिंग
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पांडेय परिवार ने एंटी करप्शन के नाम से सोसाइटी रजिस्टर्ड करा रखी थी। हर जिले में 6-7 लोग नियुक्त कर रखे थे और वहां से सरकारी विभागों में तैनात अधिकारी-कर्मचारियों के पैसे लेने या कोई अनुचित कार्य करने की वीडियो रिकार्डिंग कराते थे। इसके बाद ब्लैकमेल करके रकम वसूली जाती थी। इसके अलावा यदि उनका संबंधित जिले में काम होता था तो उसे कराने केलिए स्टिंग किए जाते थे, ताकि काम में कोई रुकावट न आए। जौनपुर में स्वास्थ्य और राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की कुछ रिकार्डिंग मिली हैं। इनसे साफ है कि इन्हें ब्लैकमेल करते थे।