-प्रमुख सरकारी अस्पतालों में साइनसाइटिस के मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही
-आरएमएल, एम्स, सफदरजंग समेत अन्य अस्पतालों में मरीज उपचार के लिए आ रहे
-खांसी-जुकाम, साइनसाइटिस, त्वचा रोग, आंखों में जलन व ईएनटी की बढ़ीं समस्याएं
सिमरन
नई दिल्ली। राजधानी में बढ़ते प्रदूषण ने लोगों की सेहत को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्मॉग और ठंड के मिश्रण से खांसी, जुकाम, गले में खराश जैसी समस्याएं आम हो गई हैं, जबकि साइनसाइटिस के मरीजों की संख्या में तेज इजाफा हो रहा है। राम मनोहर लोहिया (आरएमएल), एम्स, सफदरजंग समेत अन्य अस्पतालों में मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इसके अलावा, आरएमएल अस्पताल में प्रदूषण पीड़ितों के लिए विशेष क्लिनिक शुरू की है। यह क्लीनिक आरएमएल अस्पताल में हर सोमवार दोपहर 2 से 4 बजे तक खुला रहता है, जहां बड़ी तादाद में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
इस अस्पताल की विशेष क्लीनिक की ओपीडी में रेस्पिरेटरी, ईएनटी, नेत्र और मनोरोग विभाग के डॉक्टर एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। सबसे पहले सांस संबंधी विशेषज्ञ मरीज को देखते हैं और जरूरत पड़ने पर अन्य विभागों में रेफर करते हैं। अस्पताल प्रशासन ने लोगों से मास्क पहनने, घर के अंदर रहने और डॉक्टरी सलाह लेने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रदूषण नियंत्रण नहीं हुआ तो स्थिति और खराब हो सकती है। एक अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. भूषण कठुरिया बताते है कि यदि कुछ हफ्तों के बाद भी लक्षणों में सुधार नहीं होता है तो डॉक्टर से मिलें। आपको संभावित रूप से बैक्टीरियल संक्रमण हो सकता है। इसके लिए एंटीबायोटिक की आवश्यकता हो सकती है। सभी एंटीबायोटिक गोलियों को निर्देशानुसार लें, आमतौर पर 10-14 दिनों के लिए। इसे जल्दी बंद न करें नहीं तो संक्रमण वापस आ सकता है।
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ओपीडी में रोजाना आते हैं हजारों मामले
दिल्ली के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में प्रदूषण के मौसम में साइनसाइटिस के मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। सफदरजंग अस्पताल में दैनिक दस से बारह हजार ओपीडी मरीजों में से ईएनटी ओपीडी में प्रतिदिन पचास से साठ नए साइनस मामले दर्ज हो रहे हैं और प्रदूषण में बीस से तीस प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है। लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में तीन से साढ़े तीन हजार दैनिक ओपीडी मरीजों में ईएनटी क्लिनिक में दस से पंद्रह प्रतिशत साइनस मामले आ रहे हैं। यह अस्पताल कुल पंद्रह लाख आबादी को सेवा प्रदान करता है। इसी तरह दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में ढाई से तीन हजार दैनिक ओपीडी मरीजों में श्वसन ओपीडी में बीस प्रतिशत साइनस मामले हैं। वरिष्ठ नागरिकों क्लिनिक में इनकी संख्या अधिक रहती है।
साइनस क्या है?
साइनस चेहरे की हड्डियों में मौजूद चार जोड़ी छोटी-छोटी हवा से भरी गुहाएं (कैविटीज) होती हैं, जो मैक्सिलरी (गालों में), फ्रंटल (माथे में), एथमॉइड (नाक के पीछे आंखों के बीच) और स्फेनॉइड (नाक के पीछे गहरे में) जो नाक से बलगम के माध्यम से जुड़ी रहती हैं। इनका मुख्य कार्य हवा को नम और गर्म करना, आवाज को गूंज देना व सिर का वजन कम रखना है, लेकिन जब ये सूज जाती हैं (साइनुसाइटिस) तो सिरदर्द, नाक बंद होना और चेहरे पर दबाव जैसी समस्याएं पैदा करती हैं।
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साइनस के बचाव और सावधानियां:
बचाव:
-हाथ धोना: साबुन से 20 सेकंड तक, छींकने/खाने से पहले।
-नाक की सफाई: जल नेति (सलाइन इरिगेशन) रोज या मौसम बदलते ही।
-नमी बनाए रखें: ह्यूमिडिफायर इस्तेमाल करें, खूब पानी पीएं।
-एलर्जी कंट्रोल: एलर्जन (धूल, पराग) से दूर रहें, दवा लें।
-धूम्रपान/प्रदूषण से बचें: सिगरेट, वाहनों का धुआं न लें।
-वैक्सीनेशन: फ्लू और न्यूमोकोकल (फ्लू शॉट) वैक्सीन लगवाएं।
सावधानियां
-लक्षण 10 से अधिक दिन रहें बुखार, सिरदर्द, नाक बंद के लक्षण तो डॉक्टर के पास जाएं।
-आंख/माथे में तेज दर्द, सूजन या दृष्टि प्रभावित हो तो तुरंत ईएनटी डॉक्टर के पास जाएं।
-बच्चे/बुजुर्ग: कमजोर इम्युनिटी वाले जल्दी जांच कराएं।
-स्व-दवा न करें: एंटीबायोटिक बिना प्रिस्क्रिप्शन न लें।
-मास्क पहनें: प्रदूषित इलाके या सर्दी में।
औद्योगिक धुआं और मौसमी बदलाव प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे
पेड़ों की कटाई, औद्योगिक धुआं और मौसमी बदलाव प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं। इससे न केवल खांसी-जुकाम, बल्कि साइनसाइटिस, त्वचा रोग, आंखों की जलन और ईएनटी समस्याएं हो रही हैं। दोपहिया वाहन चालकों को त्वचा की दिक्कतें ज्यादा सता रही हैं। प्रदूषण पुरानी बीमारियों को और गंभीर बना देता है।
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वर्जन
सांस की बीमारियों के मरीजों में इजाफा हुआ है। पहले सामान्य दवाओं से ठीक होने वाले मरीज अब अस्पताल पहुंच रहे हैं। कुछ स्वस्थ लोग भी पहली बार सांस फूलने की शिकायत लेकर आ रहे हैं। पुराने मरीज फॉलोअप से पहले ही लौट रहे हैं, जो प्रदूषण के गंभीर प्रभाव को दर्शाता है।
-डॉ. अंकिता गुप्ता, एसोसिएट प्रोफेसर रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग