पुलिस अधिकारी ने बताया कि श्रमिक दिवस के मद्देनजर सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया गया था। जिससे व्यवस्था को सुचारु और सुरक्षित ढंग से संचालित किया जा सके। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा कि श्रमिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और वे सुरक्षित माहौल में अपने अधिकारों और योगदान का सम्मान करते हुए इस दिन को मना सकें।
हालांकि, कुछ कंपनियां अपने वार्षिक कैलेंडर अवकाश और बुद्ध पूर्णिमा के कारण बंद रहीं, लेकिन अधिकांश औद्योगिक इकाइयों में काम सामान्य रूप से चलता रहा। श्रमिकों ने अपने कार्यस्थलों पर ही श्रमिक दिवस को गरिमापूर्ण ढंग से मनाया और उसके बाद अपने नियमित कार्यों में जुट गए। पूरे दिन स्थिति पर लगातार नजर रखी गई और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्योआरतू) को भी तैयार रखा गया था। साथ ही, ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रमुख मार्गों और चौराहों पर यातायात पुलिस की भी विशेष तैनाती की गई थी।
श्रमिक संगठनों की ओर से भी इस बार शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम आयोजित किए गए। कहीं भी विरोध प्रदर्शन या हड़ताल जैसी स्थिति देखने को नहीं मिली, जिससे प्रशासन ने राहत की सांस ली। अधिकारियों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन की संयुक्त रणनीति और सतर्कता के चलते यह संभव हो सका।
पुलिस कमिश्नरेट ने श्रमिक वर्ग के योगदान को सराहते हुए कहा कि जिले के विकास में श्रमिकों की अहम भूमिका है और उनकी सुरक्षा, सम्मानजनक कार्य वातावरण और सुविधाओं को सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। पुलिस ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी इसी तरह सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखा जाएगा और श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य किया जाएगा।