अभी लखनावली में पुरानी डंपिंग साइट पर ही भेजा जा रहा ग्रेनो से कूड़ा
नंबर गेम- 800 टन क्षमता का है प्लांट
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा के अस्तौली में कूड़े से ग्रीन कोल बनाने का करीब 800 टन क्षमता का प्लांट दिसंबर में शुरू हो जाएगा। ग्रेनो प्राधिकरण का दावा है कि एनटीपीसी के प्लांट में पिछले दिनों ट्रायल के दौरान वायु प्रदूषण से जुड़ी कुछ तकनीकी खामियां सामने आई थीं। इसके बाद प्लांट के संचालन को शुरू करने पर अस्थायी रोक लगा दी गई थी। अब कंपनी ने वायु प्रदूषण के मानकों को ध्यान में रखते हुए जरूरी व्यवस्थाएं कर ली हैं। ऐसे में अब प्लांट को शुरू किया जा सकता है।
प्राधिकरण के मुताबिक वर्तमान डंपिंग साइट लखनावली को चरणबद्ध तरीके से बंद करना है। इसके लिए अस्तौली में कूड़े से अलग-अलग उत्पाद बनाए जाने के लिए प्लांट लगाए जा रहे हैं। इसमें रिलायंस का 300 टन प्रतिदिन क्षमता का बायो सीएनजी प्लांट, एनटीपीसी का 800 टन प्रतिदिन क्षमता का ग्रीन कोल प्लांट के अलावा 800 टन प्रतिदिन क्षमता का बायो सीएनजी बनाने का एक और प्लांट यहां प्रस्तावित है। अभी एनटीपीसी का प्लांट का ट्रायल किया जा चुका है। ट्रायल के दौरान पता चला कि हानिकारक गैसों के हवा में घुलने से रोकने के लिए जरूरी इंतजाम नहीं किए गए थे।
स्थानीय लोगों की आपत्तियों के बाद खुद प्रधान महाप्रबंधक संदीप चंद्रा ने मौके का निरीक्षण पिछले दिनों किया था। इस दौरान कंपनी के प्रतिनिधियों के अलावा स्थानीय लोगों से भी बात हुई। इसके बाद तय हुआ कि कंपनी पहले हानिकारक गैसों के हवा में घुलने से रोकने के लिए इंतजाम किए। हवा में केवल पानी की भाप को ही छोड़ने की अनुमति होगी।
टॉरिफाइड चारकोल बनाएगा प्लांट
नोएडा की एक निजी कंपनी इस प्लांट को संचालित करेगी। ईपीसी मॉडल पर विकसित इस प्लांट में कूड़े से टॉरिफाइड चारकोल जिसे ग्रीन कोल भी कहा जाता है, बनाया जाएगा। एनटीपीसी इसका उपयोग अपने पावर प्लांट में बिजली बनाने के लिए करेगा। इसके लिए प्लांट को टॉरिफैक्शन नामक एक थर्मल उपचार प्रक्रिया के लिए तैयार किया गया है। इसमें कम-ऑक्सीजन और उच्च-तापमान वाले वातावरण में कूड़े को प्रोसेस किया जाता है। इससे ज्वलनशील कचरा बिजली उत्पादन के लिए उच्च-ऊर्जा वाले कोयले के विकल्प ग्रीन कोल में बदल जाता है।
कहीं भी नहीं दिखेगा कूड़ा
सीईओ रवि कुमार एनजी का कहना है कि प्लांट में कूड़े का निस्तारण इस तरह से होगा कि वायु प्रदूषण नहीं हो। कूड़ा भी बंद गाड़ियों से यहां पहुंचेगा। इसके बाद पूरी तरह कवर्ड शेड में लगाई गईं मशीनों में प्रोसेसिंग की प्रक्रिया पूरी कर ग्रीन कोल बनेगा। खुले में कहीं भी कूड़ा नहीं गिराया जाएगा। इससे गंदगी और वायु प्रदूषण भी नहीं होगा। इसी साल के अंत में प्लांट शुरू किया जाना है।