- 2026 में यूपी में भी लगेगा बायोयुग ऑन व्हील्स का प्लांट
- पीएलए (पॉलीलैक्टिक एसिड) एक तरह का बायोप्लास्टिक है, जो शक्कर या स्टार्च जैसी जैविक चीजों से बन रहा
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में चीनी के दानों से बने उत्पाद विदेशी नागरिकों को काफी पसंद आ रहे हैं। विदेशी विजिटर्स बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड की ओर से बस में लगाई गई प्रदर्शनी को देख रहे हैं। बायोयुग ऑन व्हील्स की ओर से चीनी को रासायनिक प्रकिया से बदलकर पीएलए (पॉलीलैक्टिक एसिड) में परिवर्तित किया जा रहा है। पर्यावरण को बचाने में पीएलए रक्षक की भूमिका निभा रहा है। पीएलए से बने उत्पादों से गिलास, कटोरी, चम्मच, बोतलें और पर्यावरण-अनुकूल सजावटी सामान बनाए जा रहे हैं। पीएलए के माध्यम से कार्बन फुट प्रिंट को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि बलरामपुर चीनी मिल शक्कर के गन्ने से बायोप्लास्टिक (पीएलए) बनाने के लिए बायोयुग नामक तकनीक पर काम किया जा रहा है। जिससे जीवाश्म-ईंधन वाले प्लास्टिक के लिए 100 प्रतिशत कम्पोस्टेबल और पौधे-आधारित विकल्प तैयार हो सकें। कंपनी ने भारत का पहला औद्योगिक पैमाने पर एकीकृत पीएलए प्लांट स्थापित करने की घोषणा की है, जो गन्ने के उप-उत्पादों का उपयोग करके बायोपॉलिमर बनाएगा। यह प्लांट लखीमपुर खीरी के कुंभी में सितंबर 2026 में लगने जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पॉलीलैक्टिक एसिड एक तरह का बायोप्लास्टिक होता है, जो शक्कर या स्टार्च जैसी जैविक चीजों से बनाया जाता है। यह प्लास्टिक पर्यावरण के लिए हानिकारक नहीं होता और कुछ ही महीनों में अपने आप गल जाता है। पारंपरिक प्लास्टिक जहां सैकड़ों सालों तक मिट्टी में बना रहता है, वहीं बायोप्लास्टिक पर्यावरण के लिए ज्यादा अनुकूल होता है। आज पूरी दुनिया पारंपरिक प्लास्टिक से हो रहे नुकसान को देखते हुए बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक की तरफ बढ़ रही है।
पीएलए से बन रहीं कमीज व शार्ट
पीएलए की मदद से न केवल गिलास,कटोरी,चम्मच बनाएं जा रहे हैं,बल्कि कमीज,शार्ट,पेंट के साथ अन्य उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पीएलए से बने कपड़े बनाने के लिए रेशम,कॉटन आदि का भी उपयोग किया जाता है। बायोयुग पैकेजिंग, कपड़ा और कृषि जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अधिक टिकाऊ भविष्य के लिए नई संभावनाएं खोल रहा है।