नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक युवती को 22 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दे दी है। उसका आरोप था कि शादी का झूठा वादा करके एक व्यक्ति ने उसके साथ यौन संबंध बनाए। न्यायमूर्ति रविंद्र डुडेजा की पीठ ने कहा कि गर्भावस्था को जारी रखने के लिए मजबूर करना पीड़िता की पीड़ा को और बढ़ाएगा और इससे सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ सकता है।
याचिका में युवती ने बताया कि वह शादी के आश्वासन पर लगभग दो वर्षों तक आरोपी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रही। उसने दावा किया कि नवंबर-दिसंबर 2024 में पहली बार गर्भवती होने पर आरोपी ने दवाओं के जरिए गर्भपात कराने के लिए मजबूर किया। जून 2025 में दोबारा गर्भवती होने और गर्भपात से इनकार करने पर आरोपी ने उसके साथ मारपीट की और उसे छोड़ दिया। इसके बाद युवती ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। कोर्ट द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि युवती चिकित्सकीय रूप से गर्भपात के लिए स्वस्थ है और इस प्रक्रिया में कोई जोखिम नहीं है। रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने युवती को एम्स अस्पताल में गर्भपात की अनुमति दी। ब्यूरो