नोएडा। अस्थायी कनेक्शन की जांच शुरू होने से पहले ही अधिकारियों और कर्मचारियों की पोल खुलने लगी है। मामले में स्थायी कनेक्शन की फाइलें भी गायब हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर जांच में ही कई मामले सामने आए हैं, जिनमें नियमों को ताक पर रखकर कनेक्शन दे दिया गया। अब वह लोग दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। अधिकारियों ने पैसा तो अधिक ले लिया, लेकिन रसीद कम पैसे की दी थी। इसके अलावा कई केस ऐसे सामने आए हैं, जिनमें स्थायी कनेक्शन होने के बावजूद मीटर चालू नहीं किए गए थे। जांच में दोषी मानते हुए दो बाबू गोविंद पाठक और अनिल राणा के खिलाफ आरोपपत्र जारी कर जवाब मांगा गया है। गोविंद पाठक को निलंबित भी कर दिया है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट डिवीजन में अस्थायी कनेक्शन देने के मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई कि अफसरों और बाबुओं के काले कारनामे सामने आने लगे हैं। एक बिल्डर को 200 मेगावाट का कनेक्शन जारी कर दिया गया, लेकिन मीटर नहीं लगाया गया था, जो जून 2021 से चल रहा था। एक बिल्डर से मोटी रकम लेकर कनेक्शन ऑनलाइन मित्र पोर्टल के बजाय ऑफलाइन करा दिया गया। इसमें भी तुरंत मीटर लगाना चाहिए था, पर 9 जुलाई 2021 से आज तक नहीं लगाया गया और पत्रावली भी गायब कर दी गई है। इनके अलावा कई उपभोक्ता ऐसे हैं, जिनसे पैसे तो अधिक लिए गए, लेकिन रसीद एक चौथाई रकम की ही दी गई। अब उपभोक्ताओं की फाइल भी गायब है। अधिकारियों ने बताया कि अब स्थायी कनेक्शन में भी धांधली सामने आ रही है।
जिलाधिकारी ने मांगा जवाब
एक उपभोक्ता ने पिछले माह डीएम सुहास एलवाई से विद्युत निगम के अधिकारी-कर्मचारियों की शिकायत की थी। पीड़ित ने आरोप लगाया था कि कनेक्शन के एवज में कई लाख रुपये ले लिए गए, लेकिन रसीद कुछ हजार रुपये की दी गई है। अब अधिकारी कनेक्शन नहीं दे रहे हैं। जब डीएम ने अधिकारी से जवाब मांगा तो पत्रावली ही गायब मिली। वहीं, ग्रेटर नोएडा के अधिशासी अभियंता धीरेंद्र सिंह ने बताया कि लखनऊ से अस्थायी कनेक्शन धांधली में ग्रेटर नोएडा डिवीजन में तैनात बाबू गोविंद पाठक और अनिल राणा के खिलाफ चार्जशीट दी गई है। इस प्रकरण में गोविंद पाठक को प्रबंध निदेशक द्वारा निलंबित कर दिया गया है। उनके डिवीजन में अस्थायी ही नहीं बल्कि स्थायी कनेक्शन देने में भी भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। प्रथम दष्टया दोषी मानते हुए यह कार्रवाई की गई है।
आज आ सकती है जांच कमेटी
विद्युत निगम में अस्थायी कनेक्शन देने के नाम पर धांधली के मामले की जांच शुरू हो गई है। इसमें एक टीम ने गाजियाबाद में फाइलें खंगाली हैं। अब गौतमबुद्ध नगर की बारी है। इस सप्ताह हर डिवीजन की जांच की जाएगी। इस प्रकरण में कई और लोगों पर गाज गिरनी तय है। जांच कमेटी आज आ सकती है। ग्रेटर नोएडा और जेवर डिवीजन में 100 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला खुलने के बाद से आला अफसरों की निगाह जिले पर बनी हुई है। यहां की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। विद्युत निगम के वाणिज्य निदेशक आईपी सिंह ने गाजियाबाद पहुंचकर जांच प्रणाली का औचक निरीक्षण किया है। इससे गौतमबुद्ध नगर के अफसरों और कर्मियों के होश फाख्ता हैं। अधिकारियों की मानें तो मेरठ परिक्षेत्र में गौतमबुद्ध नगर में 80 फीसदी मामले हैं। जबकि अन्य जिलों में केवल 20 फीसदी ही प्रकरण सामने आएंगे।