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पाइपलाइन फटने से गंगाजल की बूंद-बूंद को तरसे शहरवासी

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नोएडा। सेक्टर-63 में गांव छिजारसी के पास गंगाजल की बड़ी पाइपलाइन फटने से आधे शहर में पानी की सप्लाई पर असर पड़ा है। शुक्रवार और शनिवार को तो बूंद-बूंद पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची रही। लोगों को पानी खरीदकर अपनी प्यास बुझानी पड़ी। पाइपलाइन को ठीक करने का काम चल रहा है। उधर, लोगों ने कहीं खारे की तो कहीं दूषित पानी की सप्लाई होने की भी शिकायत की है। लोगों का कहना है कि दूषित पानी को इस्तेमाल नहाने में भी नहीं किया जा सकता है।
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लोगों ने बताया कि गंगाजल की आपूर्ति के लिए बिछाई गई पाइपलाइन की गुणवत्ता अच्छी नहीं है। इस कारण पाइपलाइन कई जगह से काफी कमजोर हो गई है। जंग लगने के कारण ही शुक्रवार सुबह अचानक पाइपलाइन फट गई। इससे आपूर्ति बाधित हो गई। वहीं, सेक्टर-27 आवासीय कल्याण समिति तिकोना पार्क की सचिव अनीता निगम ने बताया कि सेक्टर में गंदा, बदबूदार पानी की सप्लाई होती है। प्रेशर बहुत कम आता है। भीषण गर्मी में रोज पानी की परेशानी को लोगों को झेलनी पड़ती है। पानी खरीदकर काम चलाना पड़ता है। अधिकारी हर बार नई लाइन डलवाने का केवल आश्वासन ही देते रहते हैं।
सेक्टर-50 के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष विमल शर्मा ने बताया कि शुक्रवार शाम व शनिवार को सुबह एक ही घंटे जलापूर्ति की गई। इस दौरान प्रेशर भी काफी कम था। शिकायत के बावजूद अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। सेक्टर-74 सुपरटेक केपटाउन निवासी विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि सोसाइटी में 25 हजार लोग रहते हैं। यहां के निवासी टोटल डिजॉल्वड सॉलिड्स (टीडीएस) 2000 तक पीपीएम वाले पेयजल का इस्तेमाल करने पर मजबूर हैं। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई उचित समाधान नहीं किया गया। प्राधिकरण और जल विभाग इस संकट को दूर करने की जरूरत नहीं समझ रहे। इलाके में कई साल से यह समस्या बनी हुई है।
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20 रुपये में पानी खरीदकर चला रहे काम
सेक्टर-73 महादेव अपार्टमेंट निवासी सुरेश ने बताया कि गर्मी में दो दिन से बिना नहाए ही काम पर जाते हैं। वैसे भी यहां का पानी नहाने लायक नहीं रहता। खारा पानी पीकर लोग परेशान हो गए। सोसाइटी में सर्फ ाबाद से टैंकर आता है। लोग 20 रुपये में पानी की बोतल खरीदकर काम चला रहे हैं। इससे लोगों में आक्रोश है। पवन शर्मा ने बताया कि सेक्टर-34 में पिछले तीन दिन से पानी की किल्लत है। हर साल गर्मियों में पानी की किल्लत होती है। अक्सर पाइपलाइन फट जाती है। जल विभाग जुगाड़ से लाइन चालू कर देता है, हफ्ते बाद फिर वही परेशानी खड़ी हो जाती है।
मेंटेनेंस के नाम पर होती है खानापूर्ति
लोगों का कहना है कि गंगाजल की पाइपलाइन साल में 2 बार मेंटेनेंस के नाम पर 1-1 महीने के लिए बंद की जाती है। इसके बाद भी दिक्कत होती है। ऐसा लगता है कि बिल बनाने के लिए खानापूर्ति होती है या फिर घटिया क्वालिटी की पाइपलाइन डाली गई है। मेट्रो अपार्टमेंट के अध्यक्ष सुभाष चौहान ने बताया कि सेक्टर में पानी की समस्या 15 दिन से लगातार बनी है। सुबह और शाम एक से डेढ़ घंटे के लिए ही पानी आता है। सोसाइटी निवासियों को जरूरी कार्य करने में भी परेशानी हो रही है।
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