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Noida News: तरौली के मेले में उमड़ेंगे लोग

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तरौली स्थित स्वामी कार्तिकेय का श्रीविग्रह।
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छाता। क्षेत्र के गांव तरौली का पौराणिक इतिहास है। शिव पुत्र स्वामी कार्तिकेय ने यहीं राक्षस तारकेश्वर का वध किया था, उन्हीं के नाम पर गांव का नाम तरौली पड़ा। यहां कुंड व स्वामी कार्तिकेय का मंदिर है। देवोत्थान एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक यहां मेला लगता है। मान्यता है कि जिस कुंड में राक्षस तारक को मारा था, उसके जल में स्नान करने से लोगों के चर्म रोग दूर हो जाते हैं।
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अकबरपुर-शेरगढ़ रोड पर तहसील मुख्यालय से दस किमी दूर बसे गांव तरौली में लगने वाले मेले में आने वाले श्रद्धालु मंदिर के निकट स्थित कुंड में स्नान कर आचमन लेते हैं। भगवान कार्तिकेय के दर्शन कर मनौतियां मांगते हैं। पांच दिवसीय मेले में जनसैलाब उमड़ने की संभावना है। दुकानों पर महिलाएं घर-गृहस्थी का सामान खरीदेंगी। बच्चों के लिए झूले लगे हैं।
मंदिर के महंत तारा पंडित ने बताया कि भगवान शंकर के पुत्र कार्तिकेय ने सात माह की उम्र में तारकासुर राक्षस का वध किया था, तभी से गांव का नाम तरौली पड़ा है। भगवान कार्तिकेय ने यहीं तपस्या की थी। बताया कि मंदिर में स्थित श्रीविग्रह कुंड की खुदाई के दौरान निकला था। यहां मंदिर बनवा कर मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कराई गई। मान्यता है कि कुंड में स्नान कर उसकी रज का शरीर पर लेप करने से कुष्ठ और चर्म रोग दूर हो जाते हैं।
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बसों का संचालन नहीं, इलेक्ट्रिक बसें चलाने की मांग
अकबरपुर-शेरगढ़ मार्ग पर निजी और रोडवेज बस बंद होने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है। मेले में आने वाले लोग बिना वाहन सुविधा के परेशानी उठा रहे हैं। वे टेंपो व डग्गामार वाहनों से यात्रा करने के लिए मजबूर हैं। इस मार्ग से अगर शेरगढ़ जाना हो तो दो टेंपो बदलने पड़ते हैं। लोगों ने प्रशासन से मार्ग पर इलेक्ट्रिक बसें चलवाने की मांग की है।
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