अब भारत समेत अमेरिका, यूरोप और दुनिया के किसी भी कोने से आप ग्रेटर नोएडा में औद्योगिक ओर आवासीय भूमि खरीद सकते हैं। इसके लिए आपको बस वेबसाइट का एक फार्म भरना होगा।
जल्द ही रियल टाइम जीआईएस तकनीक से जुडने के बाद आप भूखंड को वहां बैठकर देख सकते हैं और इसका ऑनलाइन पेमेंट भी कर सकते हैं। शुक्रवार को प्राधिकरण की ओर से ग्रेटर नोएडा इनवेस्टमेंट पोर्टल का शुभारंभ मुख्य कार्यपालक अधिकारी दीपक अग्रवाल ने किया।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अलॉटियों के लिए बड़ा दिन है। आवंटियों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बनने वाले भूखंडों के मानचित्रों का अप्रूवल अब केवल फार्म भरने पर ही हो सकेगा।
इसके लिए अब न तो आपको प्राधिकरण के चक्कर काटने होंगे और न ही किसी बाबू को सुविधा शुल्क देना पड़ेगा। प्राधिकरण की इस सुविधा के ऑनलाइन होने से बिल्डिंग के डिजाइन, एफएआर से लेकर मानचित्रों का अप्रूवल भी हो सकेगा।
वहीं, आवेदन की स्क्रूटनी भी और अप्रूवल भी ऑनलाइन पता चल सकेगा। यह कार्य 30 दिनों के अंदर-अंदर कर दिया जाएगा। इसके अलावा इनवेस्टमेंट पोर्टल के जरिए 23 प्रक्रियाएं ऑनलाइन की जाएंगी।
जिसमें 60 दिनों के अंदर आप भूखंड के स्वामी हो जाएंगे और उसमें निर्माण करा सकेंगे। इस दौरान प्राधिकरण की ओर से (नो योर अलॉटी) नाम से एक सेवा शुरू की गई है। पिछले दिनों इससे करीब तीन हजार अलॉटी इससे जुड़ चुके हैं।
खास बात यह है कि यह सारी सुविधाएं अभी तक नोएडा प्राधिकरण में भी नहीं शुरू हो पाई हैं। इसके अलावा इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप की वेबसाइट भी प्राधिकरण ने लांच कर दी है। जिससे उसके बारे में लोगों को जानकारी मिल सकेगी।
इस प्रोजेक्ट में 50 फीसदी हिस्सेदारी प्रदेश सरकार और 50 फीसदी हिस्सेदारी डीएमआईडीसी की होगी। उद्घाटन अवसर पर एसीईओ कृष्ण कुमार, ओएसडी वीपी सिंह, जीएम प्लानिंग लीनू सहगल समेत अन्य अधिकारी शामिल रहे।
एसीईओ से मिले सुपरटेक के खरीददार
ग्रेटर नोएडा। सुपरटेक बिल्डर्स के प्रोजेक्ट इकोविलेज-1 इकोविलेज-2 और इकोविलेज-3 के बड़ी संख्या में खरीददारों ने शुक्रवार को प्राधिकरण के एसीईओ पीसी गुप्ता से मिलकर अपनी समस्याएं रखीं।
इस दौरान एसीईओ ने उनको 20 मई को प्राधिकरण में बिल्डर्स और बायर्स की बैठक में समस्याएं सुलझाने के लिए कहा है। बायर्स का कहना था कि कई-कई वर्षों से पूरा पैसा देने के बावजूद बिल्डर ने न तो उनको पजेशन दिया है। इसके अलावा उनपर कई तरह के चार्ज लगाए जा रहे हैं।