ग्रेटर नोएडा (नवीन कुमार)। चिटहेरा भूमि घोटाले में भूमाफिया, अफसर और नेताओं का गठजोड़ इतना जबरदस्त था कि तहसील दादरी से चिटहेरा गांव का पट्टा रजिस्टर ही गायब करा दिया गया था। अपर जिलाधिकारी की जांच में इसका खुलासा हुआ है। एडीएम ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश की है। अब गांव का दूसरा पट्टा रजिस्टर बनाया जाएगा।
सभी तहसील में हर गांव का एक पट्टा रजिस्टर होता है। जिसमें गांव के पट्टा आवंटन की पूरी जानकारी होती है। रजिस्टर में कब और किस-किस को आवंटन हुआ है, इसका रिकॉर्ड रहता है। यह रजिस्ट्रर तहसील के रिकॉर्ड रूम में रखा जाता है लेकिन चिटहेरा गांव का पट्टा रजिस्टर रिकॉर्ड रूम में नहीं मिला है। एडीएम वित्त एवं राजस्व की जांच के दौरान इसका खुलासा हुआ है। रजिस्टर मांगने पर तहसील अधिकारियों ने उसके उपलब्ध नहीं होने की रिपोर्ट भेजी थी।
माना जा रहा है कि चिटहेरा भूमि घोटाले में शामिल लोगों ने पट्टा रजिस्टर को ही गायब करा दिया था। जिससे पट्टों के आवंटन का रिकॉर्ड पता नहीं चल सके। वहीं तहसील प्रशासन के किसी अधिकारी ने इस संबंध में उच्च अधिकारियों को सूचना भी नहीं दी थी। अब एडीएम ने अपनी जांच रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश डीएम से की है।
गौतमबुद्घ नगर की जगह हापुड़ में रखवा दी फाइल
एडीएम हापुड़ ने वर्ष 2015 में चिटहेरा गांव के पट्टों के आवंटन को बहाल करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ अपर आयुक्त मेरठ के यहां अपील की गई थी। पट्टों के आवंटन से जुड़ी पूरी फाइल मेरठ में थी। अपर आयुक्त ने एडीएम हापुड़ की कोर्ट के आदेश का बरकरार रख केस खारिज कर दिया था। वहां से चिटहेरा गांव की पूरी फाइल गौतमबुद्घ नगर आनी थी, लेकिन फाइल को हापुड़ भेज दी गई। बताया गया है कि घोटाले में शामिल लोगों की मदद के लिए फाइल को छिपा दी गई। जबकि नियमानुसार जमीन से जुड़ी पूरी फाइल संबंधित जिले में भेजी जाती है।
पट्टा पत्रावली में छेड़छाड़ पर भी दर्ज हो एफआईआर
भूमाफिया ने दस्तावेज में जमीन का रकबा बढ़ा दिया था। जांच में सामने आया है कि पट्टा पत्रावली में जमीन का रकबा बढ़ाया गया। उस समय पट्टा पत्रावली मेरठ में अपर आयुक्त की कोर्ट में होने की बात सामने आई है। अपर जिलाधिकारी ने संबंधित अभिरक्षा अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है।