जिले के आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में इन दिनों बुखार और डायरिया से राहत देने वाले सीरप ही उपलब्ध नहीं हैं। इस कारण मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। हालांकि चिकित्सकों का दावा है कि सीरप के स्थान पर अन्य दवाएं देकर मरीजों का उपचार दिया जा रहा है।
जिले में 25 आयुर्वेदिक व एक यूनानी अस्पताल है। शासन की ओर से पिछले दिनों इन चिकित्सालयों में चिकित्सकों की कमी को तो दूर कर दिया गया है, लेकिन दवाओं की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। आलम यह है कि इन दिनों बुखार, वायरल और डायरिया के मरीजों की संख्या सर्वाधिक हैं।
जिले के प्रत्येक आयुर्वेदिक अस्पताल में औसतन 70-80 मरीज रोजाना आते हैं। इनको बुखार, वायरल से निजात दिलाने वाले सीरप मुहैया नहीं हो पा रहे। यहां तैनात चिकित्सक सीरप की जगह अन्य दवाओं को देकर मरीजों को उपचार मुहैया करा रहे हैं। जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में तैनात चिकित्साधिकारी डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि सीरप अभी शासन स्तर से ही नहीं आए हैं। हम मरीजों का दूसरी दवाओं के जरिये उपचार कर रहे हैं।
यह सीरप नहीं हैं उपलब्ध
अमृतारिष्ट बुखार , जुकाम
वासका सव खांसी
कुटर्जारिष्ट पेट खराब, डायरिया
दवा की अपेक्षा सीरप जल्दी असर करते हैं, लेकिन चिकित्सालय में वर्तमान सीरप ही नहीं हैं। इस कारण दवा लेकर ही काम चलाना पड़ रहा है।
-एनडी भारद्वाज, मरीज, तरफरा।
आयुर्वेद की दवाएं सबसे बेहतर होती हैं। आयुर्वेद में आने वाले सीरप ज्यादा लाभदायक होते हैं। फिलहाल सीरप नहीं मिल रहे हैं। सिर्फ दवाएं मिल रही हैं।
-दुर्गेश, तीमारदार, कटैलिया।